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अजादारी का विरोध करने वाले इंसानियत के दुश्मन है : आगा रूही

  |  2015-10-17 20:18:56.0

hameedul hasanतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ, 17 अक्टूबर.
मोहर्रम की दूसरी तारीख को मजलिसों में अलग-अलग शीर्षकों से मौलानाओं ने मजलिसों को खिताब किया और बताया कि आज ही की तारीख को इमाम हुसैन अ.स. का काफिला कर्बला में पहुंचा था. मदरसिये नाजमिया में मौलाना सैयद हमीदुल हसन ने कहा कि कुरान औेर अहलेबैत का मिशन एक है.


विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित अफजल महल में जालिम और जुल्म के शीषर्क से मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद अली नासिर सईद आब्काती आगा रूही ने कहा कि मजलिसों में फर्श अजा बिछने से जालिम और मजलूम के दरमियान का अंतर मालूम होता है. आज जालिम सरकारों को जालिमों के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन मजालिस हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी मजहब से संबंध रखने वाला जब कर्बला की घटना को सुनता है तो इसके दिल में इंसानियत का दर्द होता है. अजादारी के खिलाफ वह लोग है जो इंसानियत के दुश्मन है. अजादारी अमन, भाईचारा का पैगाम देती है.


मदरसे नाजमिया में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद हमीदुल हसन ने कुरानऔर अहलैबैत की शीषर्क से कहा कि कुरान और अहलैबेत का मिशन एक है कि इंसान को नेक बनाया जाये. उन्होंने कहा कि कुरान हिदायत के लिए आया और अहलैबैत ने इसे अमल से पहचनवाया. मौलाना ने रसूल को आम इंसान जैसे बताने वालों की खिंचाई करते हुए कहा कि जब इंसान कुरान की तालीमात को अपनी अख्ल से समझ नहीं सकता तो रसूल आम इंसान जैसे कैसे हो सकते हैं. क्योंकि रसूल हर इल्म को जानने वाले थे. मौलाना ने रसूल पर कूड़ा फेंकने वाली औरत का जिक्र करते हुए कहा कि जब रसूल पर एक दिन उस औरत ने कूड़ा नहीं फेंका दो वह उसका हालचाल लेने गये औैर यह पैगाम दिया कि अगर किसी की तबियत खराब हो तो उसकी अयादत को जाओं चाहे वह किसी मजहब का क्यों न हो. आखिर मेें उन्होंने कर्बला के मैदान में हुसैन के काफिले की आमद बयान की.


इमामबाड़े गुफरामाब में बड़ी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा कि जो भी जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करता और विरोध करता है उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है. आज पुरी दुनिया में शियों के साथ भी यहीं हो रहा है. फिरके जाफरिया के खिलाफ इस साजिश की डोर अमरीका और इजरायल के हाथ में है और चंद मुस्लिम देश भी इनके पैरोकार है. मौैलाना ने फरमाया कि जब हजरत इमाम हुसैन ने यजीद की बयत से इंकार किया तो अहलै मक्का और मदीना ने इमाम को मश्विरा दिया कि ऐसा न करें क्योंकि इनकी जान को खतरा है और जान जा सकती है.लेकिन इमाम हुसैन मुहाफिज और वारिस दीन- ए-इस्लाम थे लिहाजा उन्होंने विरोध किया और कर्बला में कुर्बानी दी. शिया कालेज में मौलाना सैयद अब्बास नासिर सईद अब्काती ने दूसरी मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि जो अली की हिदायत को मानेगा वह कभी गुमराह नहीं होगा और जिसने अली की नाफरमानी की वह कभी सही रास्ते पर नहीं आ सकता. कहा कि कब्र में मोमिन के सिरहाने रसूल और पैतियाने अली होंगे यही बख्शीश का जरियो होंगे. उन्होंने सुन्नी उलमा की किताबों से बताया कि अगर यह नाम कफन पर लिख दिये जाए तो कब्र में निजात मिल सकती है. बाद में मसायब में इमाम हुसैन के काफिले की कर्बला में आमद बयान किये. इसकेअलावा इमामबाड़ा आका बाकर में मैौलाना मीसम जैदी ने भी बड़ी मजलिस को खिताब किया.

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