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अब राज्यसभा में भी घट जायेगी कांग्रेस की ताक़त

  |  2016-01-01 15:23:50.0

parliamnthouseनई दिल्ली, 1 जनवरी. साल भर पहले लोकसभा चुनावों में सबसे कम सीटें जीतने का रिकार्ड बनाने वाली कांग्रेस इस साल राज्यसभा में भी सबसे बड़ी पार्टी का रुतबा खोने जा रही है. आने वाले साल 2016 में 20 राज्यों की 74 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है. इनमें से 22 सीटों पर कांग्रेस के सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है लेकिन जिन राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं वहां विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति ऐसी नहीं है कि इन 22 सांसदों को फिर से राज्यसभा में भेज सके. राज्यसभा में 22 में से 11 सदस्य ही वापस राज्यसभा पहुँच पायेंगे. चुनाव के बाद राज्यसभा में कांग्रेस 67 से घटकर 56 हो जायेगी.


इस साल राज्यसभा के खत्म हो रहे कार्यकाल में भाजपा के 15 सदस्य भी शामिल हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव की बड़ी जीत का असर यहाँ नज़र आएगा और इन 15 सदस्यों की वापसी के साथ ही कुछ अन्य सीटें भी भाजपा के खाते में आ जायेंगी. राज्यसभा में अभी 48 सदस्य हैं. इस चुनाव के बाद यह संख्या बढ़ जायेगी.


कांग्रेस को आन्ध्रप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सीटों का नुकसान होगा. राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव हर 2 वर्ष बाद विधानसभा सदस्यों द्वारा वोटिंग के जरिए होता है. आम तौर पर राज्य की विधानसभा में मजबूत पार्टी के उम्मीदवार ही राज्यसभा के लिए चुने जाते हैं.

महाराष्ट्र में 4 जुलाई को राज्यसभा की 6 सीटों पर चुनाव होंगे. इनमें से 3 सीटों पर कांग्रेस, 1 सीट पर एन.सी.पी. और 1-1 सीट पर भाजपा और शिवसेना का कब्जा है लेकिन पिछले वर्ष आए विधानसभा चुनावों के नतीजों से महाराष्ट्र में कांग्रेस और एन.सी.पी. को नुक्सान होना तय है. इस राज्य से भाजपा की राज्यसभा सीटें बढ़ेंगी.


पंजाब में राज्यसभा की 7 सीटें हैं और इन सातों सीटों पर 2 चरणों में 8 अप्रैल तथा 7 जुलाई को चुनाव होंगे. इनमें से 3-3 सीटें कांग्रेस और अकाली दल के पास हैं जबकि 1 सीट पर भाजपा का कब्जा है. वर्ष 2007 के मुकाबले 2012 में विधानसभा में भाजपा कमजोर हुई है, लिहाजा भाजपा को अपना एक सदस्य राज्यसभा भेजने के लिए अकाली दल के सहारे की जरूरत पड़ेगी.

राजस्थान में 4 सीटों पर 4 जुलाई को राज्यसभा के चुनाव होंगे. इनमें से 2 सीटों पर कांग्रेस, 1 पर भाजपा और 1 पर आजाद उम्मीदवार का कब्जा है. 2014 में राजस्थान में भाजपा को मिली बढ़त का फायदा पार्टी को होना तय है. उत्तर प्रदेश में खाली होने जा रही 11 राज्यसभा सीटों पर 4 जुलाई को ही चुनाव होने हैं। इनमें से 6 सीटें बसपा के पास हैं जबकि 3 पर सपा और 1-1 सीट पर कांग्रेस एवं भाजपा का कब्जा है. आने वाले चुनावों में बसपा को नुकसान और सपा का फायदा होगा. कांग्रेस और भाजपा को ज्यादा नफा-नुकसान नहीं होगा.


आंध्र प्रदेश की कुल 6 राज्यसभा सीटों पर जून में चुनाव होंगे. इनमें से आंध्र प्रदेश में 4 और तेलंगाना में 2 सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें से 3 कांग्रेस, 2 टी.डी.पी. और 1 भाजपा के पास है लेकिन पिछले वर्ष के विधानसभा चुनावों के दौरान तस्वीर पूरी तरह से पलट चुकी है और सियासी समीकरण भी कांग्रेस के पक्ष में नहीं है. हालांकि यहां भाजपा भी बहुत फायदे में नहीं है लेकिन कांग्रेस अपनी सीटें खो सकती है और इन पर टी.डी.पी. तथा वाई.एस.आर. कांग्रेस का कब्जा हो सकता है.

बिहार में 7 जुलाई को खाली होने जा रही राज्यसभा की 5 सीटों पर जे.डी.यू. का कब्जा है. पिछली बार इन सीटों पर जे.डी.यू. को भाजपा का समर्थन मिला था लेकिन इस बार ये सीटें जे.डी.यू. और राजद में बंटने के आसार हैं क्योंकि विधानसभा में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद की ताकत नीतीश कुमार की जे.डी.यू. के मुकाबले ज्यादा है. राज्य में कांग्रेस और भाजपा को इस वर्ष न कोई फायदा होगा और न नुकसान होने के आसार हैं.

तमिलनाडु में खाली होने वाली सीटों की संख्या 6 है. इनमें से 3 सीटों पर ए.आई.ए.डी.एम.के., 2 सीटों पर डी.एम.के. और 1 पर कांग्रेस का कब्जा है. राज्यसभा चुनावों की तिथि 29 जून है. तमिलनाडु में मार्च से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी है, लिहाजा राज्यसभा में चुनावी जीत इन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर निर्भर करेगी. यदि जयललिता अपनी बढ़त बनाने में कामयाब रही तो तमिलनाडु में अम्मा की पार्टी के उम्मीदवार ज्यादा जीत सकते हैं.

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