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आसान हो जाएगी प्रोफेसरों की प्रोन्नति, यूजीसी कर रहा नियमो में बदलाव

 Tahlka News |  2016-05-13 06:15:45.0

नयी दिल्ली. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के दस लाख शिक्षकों को प्रोन्नति की प्रक्रिया जल्द ही आसान होगी. इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) मौजूदा अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक (एपीआई) नियमों में बदलाव कर रहा है.

दरअसल, यूजीसी ने शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए सन 2010 में एपीआई जारी किया था. इसमें तीन व्यापक पैमाने थे. पहला शिक्षण, सीखना और मूल्यांकन, दूसरा सह पाठ्यक्रम संबंधी गतिविधियां और ugc logoतीसरा शोध, प्रकाशन और अकादमिक सहयोग है. इन तीनों मानकों में भी कई उप मानक हैं. शिक्षकों के लिए यह अनिवार्य था कि इनमें से प्रत्येक मानदंड के तहत उन्हें हर साल एक निश्चित अंक हासिल करने होंगे.

पहले पैमाने के तहत न्यूनतम 75, दूसरे के तहत 10 और तीसरे के तहत 15 अंक हासिल करने होंगे. यानी यदि किसी सहायक प्रोफेसर को चार साल की सेवा के बाद प्रोन्नति पानी है तो उसका कम से कम चार सौ अंकों का एपीआई स्कोर होना चाहिए. इसमें हर साल सौ अंक होने चाहिए और तीनों पैमाने में न्यूनतम अंक सीमा भी हासिल करना होगा. इसका शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा था.


यूजीसी के चैयरमैन डा. वेद प्रकाश का कहना है कि इन नियमों में अड़चनों को दूर किया जाएगा. पहला यह कि किसी भी पैमाने मं निश्चित अंकों का स्कोर हासिल करने का प्रावधान खत्म होगा.

मसलन यदि किसी शिक्षक का शोध पत्र प्रकाशित नहीं हुआ है तो इसके 15 अंक उसे हासिल नहीं होते हैं. लेकिन अगर वह किसी दूसरे पैमाने में अतिरिक्त अंक हासिल कर लेता है,तो उसे मान लिया जाएगा. इसी प्रकार हर साल न्यूनतम सौ अंकों की शर्त को भी हटा लिया जाएगा. केवल प्रोन्नति के समय आवश्यक न्यूनतम अंक होने चाहिए. भले ही यह किसी साल कम या ज्यादा हो. केंद्र, राज्य, निजी तथा डीम्ड विवि के दस लाख शिक्षकों को प्रोन्नति में राहत मिलेगी.

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