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इकबाल की रिहाई से फिर उठा फर्जी गिरफ्तारी का जिन्न

  |  2016-02-05 09:34:03.0

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. कभी आतंकी घटनाओं में शामिल होने और कभी साजिश करने के जुर्म में अक्सर गिरफ्तार होने वाले मुस्लिम युवाओं की न्यायालय से हो रही रिहाई के बाद यह सवाल उठने लगे हैं की क्या वाकई बेगुनाहों को आतंक के नाम पर पकड़ रही है . अगर ऐसा नहीं है तो आखिर जिसे आतंकी बता कर मीडिया के सामने जोर शोर से अपना गुडवर्क प्रचारित करने वाली पुलिस आखिर क्यूँ आदालतो में सबूत देने में पीछे रह जाती है? और फिर यह भी सवाल खड़े होते हैं कि अगर ये युवक बेगुनाह थे तो जेलों में कटे इनके कई बेशकीमती साल और समाज में इनके परिवारों पर लगे धब्बो के जिम्मेदारों पर आखिर कब कार्यवाही होगी ?

गुरुवार को ऐसे ही घटना में इकबाल को लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने बेगुनाह मानते हुए उसकी रिहाई के आदेश दे दिए. इकबाल पर दिल्ली में भी आतंकी साजिश रचने का आरोप था जिससे वे पहले ही बरी हो चुके थे. लखनऊ के थाना वजीरगंज में दर्ज अपराध संख्या 281/2007 में निरुद्ध शामली निवासी इकबाल पुत्र मुहम्मद असरा के ऊपर आईपीसी 307, 121, 121ए, 122, 124ए, यूएपीए 16, 18, 20, 23 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था.


begunah aatankiगिरफ्तारी के 8 साल बाद इकबाल को कोर्ट ने बाईज्जत बरी कर दिया. इकबाल की रिहाई ने पहले से ही उठ रहे सवालों को और हवा दे दी है.

इकबाल को जलालुद्दीन व नौशाद के साथ 23 जून 2007 में लखनऊ में आतंकी वारदात करने के लिए आने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में पुलिस ने एक मुठभेड़ होने का भी जिक्र किया था. अब पुलिस की उस थ्योरी पर भी सवालिया निशान लगे हैं और तत्कालीन डीजीपी बिक्रम सिंह व एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल समेत पूरी पुलिस की टीम सवालों के घेरे में आ गयी है.

इस तरह के मामलों को मजबूती से उठाने वाले संगठन रिहाई मंच ने अब यह मांग कर दी है कि आईबी द्वारा इन कथित आतंकियों के बारे में जो इनपुट जारी किया गया था व जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने मुठभेड़ दिखाकर इनको पकड़ा उस पर आईबी प्रमुख को अपना पक्ष रखना चाहिए।

रिहाई मंच ने यह भी सवाल उठाया है कि 21 मई 2008 को दिल्ली से इकबाल की गिरफ्तारी में मोहन चन्द्र शर्मा व संजीव यादव जैसे दिल्ली स्पेशल सेल के अधिकारी थे। जिन्होंने उस वक्त कहा था कि आतंकी संगठन हूजी से जुड़ा इकबाल ने राजधानी में जनकपुरी में विस्फोटक व अन्य पदार्थ छिपाए हैं और उसने पाकिस्तान में टेªनिंग ली थी।  अब संजीव यादव से जरूर पूछताछ करनी चाहिए कि इकबाल के पास से उन्होंने जो 3 किलो आरडीएक्स बरामद दिखाया था वह उनके पास कहां से आया ?

सामजिक  कार्यकर्त्ता शाहनवाज आलम का कहना है कि अब समय आ गया है कि खुद सुप्रीम कोर्ट दिल्ली स्पेशल सेल के खिलाफ अपनी निगरानी में आतंकवाद के मामलों में उसके द्वारा की गई गिरफ्तारियों की जांच कराए क्योंकि दिल्ली स्पेशल के दावे अनगिनत मामलों अदालतों द्वारा खारिज किए जा चुके हैं।  ऐसे ही एक फर्जी गिरफ्तारी के मामले में तो एनआईए ने दिल्ली स्पेशल सेल के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश तक की है।

रिहाई मंच के राजीव यादव आरोप लगते हुए कहते हैं कि दिल्ली स्पेशल सेल जब किसी राजनेता का कद बढ़ना होता है तब किसी मुस्लिम युवा को दिल्ली स्टेशन से गिरफ्तार दिखा देती है। उन्होंने कहा कि इकबाल के दोष मुक्त होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती व वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। क्योंकि जहां यह मायावती के कार्यकाल में पकड़ा गया था तो वहीं अखिलेश यादव की वादा  खिलाफी के चलते सालों जेल में सड़ने के लिए मजबूर था। उन्होंने बताया कि इकबाल ने यह संदेह जाहिर किया है कि उसके शरीर में चिप लगाई गई है। जो एक अलग से जांच का विषय है।

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