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इस्‍लाम जुल्‍म और जालिम के खिलाफ है

  |  2015-10-21 16:51:43.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो 

अम्बेडकर नगर, 21 अक्टूबर. इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना माहे मोहर्रम का चाँद दिखने बाद मजलिस, मातम और नौहों का दौर शरू हो जाता है।हर साल की तरह इस साल भी मोहर्रम का चाँद दिखने के बाद मजलिस, मातम और अज़ादारी का  सिलसिला शुरू हो गया है। आज सात मोहर्रम को अम्बेडकरनगर के ग्राम रुद्रपुर भगाही में सात मोहर्रम की मजलिस को जाकिर-ए-अहलेबैत मौलाना मोहम्मद रज़ा ने कुरआन और अहलेबैत के उन्वान से मजलिस को ख़िताब करते हुए कहा की मुसलमान का ईमान तभी मुकम्मल होगा, जब कुरआन और अहलेबैत दोनों को एक साथ लेकर चलेगा किसी एक को भी छोड़ा तो वह सिर्फ वह खुद को मुसलमान कह सकता है, लेकिन मुसल्ल्म ईमान वाला मुसलमान नहीं हो सकता।


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मौलाना ने कहा कि आज दीने इस्लाम के खिलाफ लोगो को गुमराह किया जा रहा है। कुछ नाम निहाद मुसलमान ही मजलूमों और बेसहारा लोगों के ऊपर जुल्म और ज्यादती करके दुनिया के सामने इस्लाम की गलत तस्वीर पेश कर रहे है, लेकिन दीने इस्लाम जुल्म और जालिम के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने और मजलूम की हिमायत करने का नाम दीने इस्लाम है।

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दीने इस्लाम को समझना है तो कुरआन और अहलेबैत से समझो। रसूल स.अ. ने जो दीन को फैलाया है वह है दीने इस्लाम और कहा कि तुम्हारे बीच दो चीजे छोड़ कर जा रहे है एक कुरआन और दूसरे अहलेबैत। रसूल स. अ. ने दीने इस्लाम को फैलाया और कर्बला के मैदान में पैगम्बर-ए-रसूल के निवासे इमाम हुसैन अ.स. ने अपना घर बार लूटा कर नाना के दीन को बचाया यह है दीने इस्लाम. आखिर में मौलाना ने मसाएब हजरत कासिम अ.स. बयान किया जिसे सुनकर इमाम के चाहने वाले जारो कतार रोने लगे।

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मजलिस के बाद अंजुमन हैदरिया रुद्रपुर भागही ने अपने मख़्सूस अंदाज़ में नौहा व मातम किया। उसके बाद मेहदी का जुलूस बरामद हुआ जो अपने रवायती रास्तो से होते हुए पूरे गावं में गस्त करते हुए इख्तेताम पजीर हुआ। जुलूस में भरी संख्या में इमाम के चाहने वाले जिसमे औरते, बच्चे, बूढ़ों और नौजवानो ने शिरकत की। अंजुमन के साहबे बयाज ने अपने मख़्सूस अंदाज़ में जनाब कासिम अ. स. के नौहे पढ़े जिसे सुनकर जुलूस में मौजूद इमाम के चाहने वालों ने मातम के साथ गिरिया व बुका की।  जुलूस में आलम-ए -हजरत अब्बास अ. स.  और ताबूत इमाम कासिम अ. स. की अज़ादारो को जियारत भी कराई गयी।

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