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एफ.आई.आर. के प्रशासनिक चाबुक ने भरा अजादारों में गज़ब का जोश

  |  2015-10-20 18:06:46.0

शबाहत हुसैन विजेता
maatmलखनऊ, 20 अक्टूबर. लब्बैक या हुसैन पर जिला प्रशासन की तरफ से 70 लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. के चाबुक ने अजादारों में गज़ब का जोश भर दिया है. कल तक अज़ादारी रोड पर काले झंडे और बैनर पर जिला प्रशासन का अकेले विरोध झेल रहे मौलाना कल्बे जवाद की आवाज़ में आज दूसरी आवाजें भी जुड़ गईं. आज कुछ अन्य उलेमा भी मजलिसों में जिला प्रशासन को लब्बैक या हुसैन पर बंदिश लगाने के मुद्दे पर मुखर हुए और दूसरी मजलिसों में ज्यादा जोश के साथ यह नारा बलन्द हुआ.

इतना ही नहीं आज बड़े इमामबाड़े में छठी मोहर्रम को आयोजित आग पर मातम में नौजवानों, बच्चों और बुजुर्गों के साथ आज खातून का नाम भी जुड़ गया. हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से आयोजित होने वाले आग पर मातम में हमेशा से हिन्दू-मुसलमान शामिल होते रहे हैं. औरतें यह मातम देखने तो आती हैं लेकिन आज उन्होंने इसमें अपनी हिस्सेदारी भी कर ली.

छोटे व बड़े इमामबाड़े में कुछ दिन पहले हुए आन्दोलन की अगुवा भी औरतें ही थीं. इस आन्दोलन को खत्म करवाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने हज़ारों लोगों की मौजूदगी में अज़ादारी रोड पर काले झंडे और बैनर लगाने की इजाज़त देते हुए कहा था कि वहां पर शिया हमेशा की तरह झंडा बैनर लगायें हमें कोई एतराज़ नहीं है लेकिन इसके बाद भी मोहर्रम शुरू होते ही जिला प्रशासन अपने बयान से पलट गया.

matam-2पहले काले झंडे उतरवा लेना और बाद में लब्बैक या हुसैन पर पाबंदी लगा देना. यजीदी आतंक के खिलाफ हज़रत इमाम हुसैन के समर्थन में लगने वाले इस नारे पर बंदिश के बावजूद उसे न रोक पाने की झुंझलाहट में 70 लोगों पर एफ.आर. दर्ज होने से पुराने शहर का माहौल गर्मा गया है.

मोहर्रम तेज़ी से यौम-ए-आशूर की तरफ बढ़ रहा है. सड़कों पर स्याह लिबास वाले अजादारों की भीड़ भी बढ़ रही है. इमामबाड़े गुलज़ार हो गए हैं. कर्बला के शहीदों का गम अपने शबाब पर पहुँचने लगा है.
मोहर्रम का दौर ऐसा दौर होता है जिसमे अजादार सब कुछ भूलकर मजलिस-मातम में व्यस्त हो जाता है. लखनऊ शहर का मिजाज़ मोहर्रम में यूँ भी हर साल आम दिनों से ज्यादा टेम्प्रेचर पर रहता है. मजलिसों के साथ-साथ यह कोशिशें भी चलती रहती हैं की सब कुछ सुकून से निबट जाए.

मोहर्रम के दिनों में पुलिस और प्रशासन पर सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी रहती है और उन्ही पर सबसे ज्यादा भरोसा भी रहता है. लेकिन इस साल माहौल बिलकुल उल्टा है. मोहर्रम को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए अर्द्ध सैनिक बल लगाया गया है. लखनऊ के सर्वाधिक संवेदनशील हुसैनाबाद क्षेत्र में तैनात यह बल सिर्फ इस पर नज़र रखे है कि घंटाघर के रेलिंग पर काला झंडा न लगने पाए.

सुबह नौजवानों ने इस रेलिंग पर काले झंडे लगाये जिसे अर्द्ध सैनिक बल ने रात साढ़े बारह बजे उतार लिया. झंडे उतारने के बाद सारी रात इस रेलिंग की पहरेदारी की गई कि कहीं फिर से यहाँ झंडा न लग जाए. इस अति संवेदनशील समय में इंसानों की हिफाज़त के बजाय लोहे की रेलिंग की सुरक्षा हो रही है.

इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब अज़ादार और प्रशासन आमने-सामने खड़े हैं. प्रशासन पहली बार संदिग्ध बना है. पहली बार प्रशासन को संदेह की नज़र से देखा जा रहा है. पुराने शहर में प्रशासन को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फ़ैल रही हैं. कर्बला के शहीदों का मातम मनाने वाले प्रशासन की सुरक्षा में खुद को असुरक्षित मान रहे हैं.

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