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एसपी के अपहरण से जुड़े हैं पठानकोट एयरबेस हमले के तार

  |  2016-01-03 11:58:01.0

Killed-terrorists-620x330पठानकोट, 3 जनवरी. पठानकोट के एयरबेस पर हुए आतंकी हमले की साज़िश का असर कुछ कम किया जा सकता था अगर इस घटना से दो दिन पहले पकिस्तान सीमा स्थित नरोट जैमल सिंह पुलिस स्टेशन इलाके में पुलिस अधीक्षक सलविन्द्र सिंह, उनके दोस्त जो गाड़ी ड्राइव कर रहे थे और एक अन्य के अपहरण की घटना के बाद मिली जानकारी को गम्भीरता से लिया गया होता.


पुलिस अधीक्षक अपहरण काण्ड के बाद आतंकियों को लगा कि जो व्यक्ति गाड़ी ड्राइव कर रहा है वह पुलिस अधीक्षक है. गाड़ी में मौजूद पुलिस अधीक्षक और अन्य व्यक्ति को आतंकियों ने रास्ते में फेंक दिया और गाड़ी ड्राइव करने वाले राजेश वर्मा को आगे ले जाकर आतंकियों ने उसका गला रेत दिया और उसे जंगल में फेंक दिया.


मौत के मुंह से लौटकर आये राजेश वर्मा ने गाड़ी में हुई आतंकियों की बातचीत की जानकारी दी थी. उसने बताया था कि आतंकी आपस में बात कर रहे थे कि कि उनका सिक्खों के साथ कोई झगड़ा नहीं है. उन्हें तो अफजल गुरु की मौत का बदला लेना है. इसी वजह से एसपी और उनके कुक को छोड़ दिया गया और क्योंकि ड्राइवर सिक्ख नहीं था इसलिए आगे जाकर उसका गला रेता गया. आतंकियों ने उसकी जेब में रखे दो हजार रुपए निकाल लिए. उन्होंने उसका मोबाइल छीन लिया और गला काटने के बाद उसे मरा समझ कर एयरफोर्स बेस कैंप के पीछे जंगल में छोड़कर चले गए.


राजेश वर्मा ने बताया कि वह बुरी तरह से घायल था. खून में लगभग नहा गया था लेकिन उसी हालत में अपने गले को बांधकर पास के गांव पहुंचा मगर उसकी किसी ने भी मदद नहीं की. उसने खुद को अमीर आदमी बताकर मुंहमांगा पैसा देने की बात की. मगर किसी ने उसे अस्पताल नहीं पहुँचाया. उसी हालत में वह गुरूद्वारे पहुंचा और बेहोश हो गया. गुरद्वारे के ग्रंथी ने उसकी मदद की और उसके परिवार वालों को फोन पर सूचना दी. राजेश वर्मा ने बताया कि कार में सवार सेना की वर्दी पहने 6 आतंकियों में से 4 हथियारों से लैस तथा दो बिना हथियार के थे. इन्होंने जूतों के फीतों से उसके हाथ पैर बांधकर गांव के पास पठानकोट के पास मरा समझकर फेंक दिया. राजेश वर्मा ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों को पूरी बात बतायी लेकिन किसी ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया बल्कि पंजाब पुलिस ने उसे जलील किया. सारे दिन वह यही रट लगाता रहा कि वे आतंकवादी थे लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया. उसने कहा था कि छह आतंकी पठानकोट में घुस चुके हैं और हथियारों से लैस हैं लेकिन लापरवाह पुलिस और ख़ुफ़िया विभाग ने फ़ौरन कोई कार्रवाई नहीं की.


बताया जाता है कि गुरदासपुर में पुलिस अधीक्षक मुख्यालय रहे सलविंदर सिंह का कुछ दिन पहले ही गुरदासपुर से तबादला हुआ था. वह अपने दोस्त राजेश वर्मा तथा कुक के साथ अपनी कार से नरोट जैमल सिंह क्षेत्र में एक धार्मिक स्थान पर पूजा अर्चना करके लौट रहे थे. रास्ते में गांव सिम्बली गुज्जरा के पास छह हमलावरों ने उनका अपहरण कर लिया था।

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