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कोर्ट का Odd-even रुल में दखल से इंकार,15 जनवरी तक रहेगा नियम

  |  2016-01-11 10:59:54.0

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नई दिल्ली, 11 जनवरी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के 15 दिनी सम-विषम फार्मूले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि सम-विषम फार्मूला एक नीतिगत निर्णय है और इसे विशेषज्ञों की राय के आधार पर लागू किया गया है। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी एवं न्यायाधीश जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि 'योजना के असंवैधानिक या कानूनी प्रावधानों के प्रतिकूल न होने तक अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।'

पीठ ने कहा कि पायलट परियोजना 15 दिनों की अवधि के लिए है।

न्यायालय ने कहा, "हमारी राय है कि इस न्यायालय का हस्तक्षेप न्यायसंगत नहीं है।"

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "अदालत इस पर बरकरार है कि न्यायालय योजना में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगा, जब तक कि यह असंवैधानिक, कानूनी प्रावधानों के प्रतिकूल, तर्कहीन या सत्ता का दुरुपयोग करने वाली न हो, क्योंकि योजना से संबंधित निर्णय संबंधित विशेषज्ञों की समझ के आधार पर लिया गया है और अदालतें सामान्य तौर पर एक नीतिगत निर्णय के औचित्य पर सवाल उठाने में समर्थ नहीं हैं।"


न्यायालय ने कहा, "यह देखते हुए कि 28 दिसंबर, 2015 की अधिसूचना के तहत प्रतिबंध सिर्फ 15 दिनों के लिए है और स्कीम को प्रदूषण के स्तर में कटौती करने के लिए एक पायलट परियोजना के रूप में लागू किया गया है, ऐसे में हमारी राय है कि इस न्यायालय का हस्तक्षेप न्यायसंगत नहीं है।"

पीठ ने हालांकि दिल्ली सरकार से कहा कि वह भविष्य में ऐसे प्रतिबंध या रोक लागू करने से पूर्व सम-विषम फार्मूला को लेकर 12 से ज्यादा अलग-अलग याचिकाओं में उठाए गए सवालों पर विचार-विमर्श कर ले।

दिल्ली की आप सरकार ने सम-विषम फार्मूला का यह कहते हुए बचाव किया था कि इस फार्मूला का वायु प्रदूषण पर एक 'पुख्ता सकारात्मक प्रभाव' हुआ है।
(आईएएनएस)|

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