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छोटे बजट की फिल्मों से सेंसर बोर्ड करता है भेदभाव : विकास

 Tahlka News |  2016-03-09 03:25:13.0

censor board facts
नई दिल्ली, 9 मार्च. 'बेचारे बीवी के मारे' के निर्माता विकास राव ने कहा है कि उनकी फिल्म के साथ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने भेदभाव भरा सलूक किया, क्योंकि यह एक छोटे बजट की फिल्म है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म से 'साला' शब्द निकालने के लिए कहा गया, जबकि उसी वक्त आर. माधवन की फिल्म 'साला खड़ूस' को बिना किसी कांट-छांट के मंजूरी दे दी गई।


राव ने कहा कि न्याय के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर किया है।

उन्होंने कहा, "नवंबर 2015 में सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने से पहले 17 दृश्यों पर आपत्ति की गई, जिसका हमने विधिवत पालन किया। लेकिन हमें उसके बावजूद यू/ए प्रमाणपत्र दिया गया।"

राव ने आईएएनएस को बताया, "संयोग से मैंने हाल में फिल्म साला खड़ूस देख ली और पाया कि हमारे साथ भेदभाव किया गया है। इसलिए हमें फरवरी 2016 में उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल किया है।"

राव एमजी 10 नाम के प्राडक्शन हाउस के प्रमुख है, जिनकी पहली फिल्म 'बेचारे बीवी के मारे' हैं।

उन्होंने कहा कि बड़े बजट की फिल्म जिसका नाम साला खड़ूस है उसे 'ए' प्रमाणपत्र दिया गया, जबकि हमारी फिल्म से इसी शब्द को काटने को कहा गया और हमने फिल्म में 17 कट लगाए। इसके बावजूद हमें यू/ए प्रमाणपत्र जारी किया गया। इस फिल्म को पहले मार्च में रिलीज करने की तैयारी थी, लेकिन विवादों के कारण अब इसे अप्रैल में रिलीज किया जाएगा। (आईएएनएस)|

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