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जम्मू-कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन

  |  2016-01-07 04:59:03.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्‍ली, 7 जनवरी.
जम्मू-कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद का दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वे दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने आज सुबह 8 बजे अंतिम सांस ली। कई दिनों से बीमार चल रहे मुफ्ती को पिछले चार दिनों से वेंटीलेटर पर रखा गया था। मोहम्मद सईद 79 के साल थे। वे पिछले साल ही जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने थे। वे 22 दिसंबर से ही एम्स में भर्ती थे। वे पिछले काफी वक्त से ऐसे संकेत दे रहे थे कि वे अपनी विरासत अपनी बेटी महबूबा मुफ्ती को सौंपना चाह रहे थे।

जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि मुफ्ती के साथ किए गए कामों का अनुभव प्रशासनिक स्तर पर बहुत काम आएगा।


https://twitter.com/RashtrapatiBhvn/status/684941115045232640

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक जताया है।

https://twitter.com/narendramodi/status/684945967787847680

साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहम्‍मद सईद के निधन पर शोक जताया है।

https://twitter.com/abdullah_omar/status/684935618493743104

वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक जताया है। उनके पार्थिव शरीर को श्रीनगर ले जाया जाएगा।

सईद के निधन के बाद उनकी बेटी जम्मू-कश्मीर की नई मुख्यमंत्री हों सकती हैं। पीडीपी नेता रफी अहमद मीर ने भी स्वीकार किया। सईद दो बार जम्‍मू-कश्‍मीर के सीएम रहे। वे 1989 से 1990 के बीच देश के गृह मंत्री भी रहे।

पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर के 12वें मुख्यमंत्री थे। 79 साल के सईद को सौम्य राजनेता के रूप में देखा जाता था। अपनी बेटी महबूबा मुफ्ती के साथ 1999 में खुद की पार्टी पीडीपी का गठन करने से पहले सईद ने अपने राजनीतिक करियर का लंबा समय कांग्रेस में बिताया।


साल 1950 के दशक में वो जीएम सादिक की कमान में डेमोक्रेटिक नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी रहे। नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला की तरह गोल्फ प्रेमी सईद ने अपनी पार्टी के गठन के तीन साल के भीतर ही कांग्रेस के समर्थन से प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। हालांकि, 2008 के विधानसभा चुनाव में वो हार गए और उमर अब्दुल्ला ने राज्य में अपनी पार्टी को जीत दिलाई।


12 जनवरी 1936 को अनंतनाग जिले के बिजबेहरा में पैदा हुए सईद श्रीनगर के एस पी कॉलेज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं जहां से उन्होंने कानून और अरब इतिहास में डिग्री हासिल की थी। सईद ने 1962 में अपने जन्मस्थान से डीएनसी की कमान में चुनाव जीत कर चुनावी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने 1967 में भी इसी सीट से जीत हासिल की, जिसके बाद सादिक ने उन्हें उपमंत्री बनाया।


1972 में वो कैबिनेट मंत्री बने और विधान परिषद में कांग्रेस के नेता भी, 1975 में उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन वो अगले दो चुनाव हार गए। 1986 में केंद्र में राजीव गांधी की सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री पर्यटन के रूप में शामिल होने वाले सईद ने एक साल बाद मेरठ दंगों से निपटने में कांग्रेस के तौर-तरीकों का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। वहीं सन्

1989 में वो देश के पहले  मुस्लिम गृहमंत्री बने।


देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री की छवि को उस समय धक्का लगा, जब वीपी सिंह की अगुवाई वाली सरकार ने उनकी तीन बेटियों में से एक रूबिया की रिहाई के बदले में पांच लोगों को छोड़ने की आतंकवादियों की मांग के आगे घुटने टेक दिए थे। इसके बाद घाटी में आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू किया था। उसी समय 1990 में वादियों से कश्मीरी पंडितों का विस्थापन शुरू हुआ।










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