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जल्लीकुट्टी केस: SC ने लगाई रोक, मोदी सरकार को झटका

  |  2016-01-12 08:40:34.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो

नई दिल्ली, 12 जनवरी. पोंगल के दौरान सांड या बैलों को काबू करने वाले खेल (जल्लीकुट्टी) पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके पहले मुख्यमंत्री जयललिता की मांग पर मोदी सरकार ने इसे हरी झंडी दी थी।


क्यों लगा था जल्लीकुट्टी पर बैन
तमिलनाडु के परंपरागत खेल में सांड या बैलों के बीमार होने और क्रूरता के कई मामले सामने आए थे। 2011 में पर्यावरण मंत्रालय ने जल्लीकुट्टी पर रोक लगाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बैन को सही ठहराया था। जल्लीकुट्टी में सांड को काबू करने वाले विनर को लाखों रुपए का कैश प्राइज दिया जाता है। इसे देसी बुल फाइट भी कहते हैं। तमिलनाडु समेत साउथ इंडिया के कई हिस्सो में लंबे समय से विवादों में रहे इस खेल पर 5 साल से रोक लगी थी। बता दें कि 13 जनवरी से साउथ इंडिया में पोंगल की शुरुआत होगी। इसी दौरान ये खेल होता है।


क्या है मंत्रालय के नोटिफिकेशन में
पर्यावरण मंत्रालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु में जल्लीकुट्टी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाड़ी दौड़ को मंजूरी दी। सरकार के नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि इन परंपरागत खेलों के दौरान एनीमल्स के साथ क्रूरता ना हो और सिक्युरिटी के पुख्ता इंतजाम हों। जल्लीकट्टू के दौरान सांड या बैलों को 15 मीटर के दायरे के अंदर ही काबू करना होगा। बैलगाड़ी दौड़ एक खास तरह के ट्रैक पर कराई जाए, जो दो किलोमीटर से ज़्यादा लंबा ना हो।


जयललिता ने लिखा था सरकार को लेटर
मुख्यमंत्री जयललिता ने कुछ दिन पहले मोदी सरकार को लेटर लिख कर जल्लीकुट्टी से रोक हटाने की मांग की थी। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसे देखते हुए सरकार का ये फ़ैसला अहम माना जा रहा है। एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने जल्लीकुट्टी को मंजूरी देने वाले सरकार के फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

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