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जानिए डॉ. बलराम जाखड़ से जुडी कुछ खास बातें

  |  2016-02-03 08:23:33.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 3 फरवरी.  पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता बलराम जाखड़ का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास में सुबह लगभग सात बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे और पंजाब से कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता सुनील जाखड़ ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार पंजाब के अबोहर शहर में स्थित उनके पैतृक गांव पंचकोसी में गुरुवार सुबह 11 बजे किया जाएग। बलराम जाखड़ को एक साल पहले मस्तिष्काघात हुआ था। उनके परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं।


वह 1980 से 1989 के बीच लोकसभा अध्यक्ष रहे और इस दौरान उन्होंने संसदीय कार्यो के स्वचालन और कम्प्यूटीकरण में महत्पूर्ण भूमिका निभाई थी।


इसके अलावा उन्होंने संसद संग्रहालय की स्थापना में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

वह पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री और 30 जून, 2004 से 30 मई, 2009 के बीच मध्यप्रदेश के राज्यपाल भी रहे।


डॉ. बलराम जाखड़ एशियाई मूल के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें राष्ट्रमंडल सांसद कार्यकारी फोरम के सभापति के रूप में चयनित किया गया।


उनका जन्म 23 अगस्त 1923 को तत्कालीन पंजाब में फजिल्का (अब अबोहर) जिले के पंचकोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम चौधरी राजाराम जाखड़ और मां का नाम पातोदेवी जाखड़ था। वह एक जाखड़ वंश के जाट परिवार में पैदा हुए थे।  बलराम जाखड़ ने 1945 में फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर (अब पाकिस्तान) से संस्कृत में डिग्री प्राप्त की और उन्हें अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और पंजाबी भाषा का भी अच्छा ज्ञान था।


बलराम जाखड़ के राजनैतिक जीवन की शुरूआत 1972 में हुई जब वह विधानसभा में चयनित हुए। 1977 में दोबारा जीत दर्ज करने के बाद उन्हें नेता विपक्ष का पद मिला। फिरोजपुर संसदीय क्षेत्र से साल 1980 में सातवीं लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद बलराम जाखड़ को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया। अगली बार आठवीं लोकसभा चुनावों में भी वह सीकर संसदीय क्षेत्र से चुनकर आए।


रिसर्च को बढ़ावा देते हुए साल 1980 से 1989 तक लोकसभा अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने लोकसभा की लाइब्रेरी विकसित की। पार्लियामेंट से जुड़ी चीजों का म्यूजियम, तथ्यों का कंप्यूटराइजेशन, मशीनों का ऑटोमेशन वगैरह करवाने में उनकी बड़ी भूमिका रही।


1991 में बलराम जाखड़ केंद्रीय कृषि मंत्री भी बनाए गए। पेशे से कृषक और बागवानी करने के शौकीन रहे बलराम जाखड़ पीपुल, पार्लियामेंट और एडमिनिस्ट्रेशन नाम की एक किताब के लेखक भी रहे। वर्ष 1975 में बागवानी की प्रक्रिया को सशक्त बनाने के कारण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ने बलराम जाखड़ को उद्यान पंडित की उपाधि से नवाजा था। इसके अलावा कई यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें कृषि जगत में योगदान के लिए सम्मानित किया था।


डॉ. बलराम जाखड़ के दोनों बेटे राजनीति में शामिल हुए। बड़े बेटे सज्जन कुमार जाखड़ पंजाब के पूर्व मंत्री हैं। दूसरे बेटे सुरिंदर कुमार जाखड़ की गोली लगने से 17 जनवरी 2011 को फिरोजपुर में मौत हो गई थी।






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