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DOPT ने दिखाए सख्त तेवर, सूबे में बदलेंगे 30 से ज्यादा जिलों के डीएम !

 Tahlka News |  2016-03-25 14:24:28.0

लखनऊ। प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला थमने वाला नहीं है. उम्मीद की जा रही है की कम से कम 30 से 40 जिलों के डीएम बदलने वाले हैं. iasइनमे से 22 वो हैं जिन्होंने कैडर बदलने के बाद ट्रेनिंग नहीं ली है. अब ये नए आईएएस अफसर ट्रेनिंग के लिए भेजे जायेंगे.

इसबीच यह भी माना जा रहा है की चुनावी साल में सरकार अपने फ्लैगशिप कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने के लिए बेचैन है. इसके लिए भी अपने ख़ास अफसरों को जिलों में बैठाया जाएगा. इन अफसरों में अमृत त्रिपाठी, आशुतोष निरंजन और मोनिका रानी के जिलाधिकारी बनने की प्रबल संभावना है.

फिलहाल 22 जिलों में ऐसे जिलाधिकारी हैं जिन्होंने आईएएस कैडर में प्रमोशन होने के बावजूद अब तक इंडक्शन कोर्स नहीं किया है और जिलों में बतौर डीएम् काम कर रहे हैं . अब केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पीसीएस से प्रमोट हुए आईएएस अफसरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगर इंडक्शन कोर्स नहीं करने जाते हैं तो उनको वापस रिवर्ट कर दिया जाएगा। इससे 22 जिलों की कमान संभाल रहे प्रमोटी जिलाधिकारियों की कुर्सी पर संकट मंडरा रहा है।


इस सिलसिले में कई बार रिमांडर भेजने के बावजूद इस बार डीओपीटी ने इस बार सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर प्रमोटी आईएएस अफसर इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए नहीं गए तो उनको रिवर्ट कर दिया जाएगा। डीओपीटी का यह आदेश उन प्रमोटी आईएएस अफसरों के लिए गले की हड्डी बन गया है, जिनको प्रमोट हुए तीन-चार साल हो गए और इंडक्शन ट्रेनिंग पर नहीं गए।

हालाकि जिले की कुर्सी छोड़ने का मन न बना पा रहे ये प्रमोटी आईएएस अफसर अपनी कुर्सी बचाने के लिए जहां अपने राजनीतिक आकाओं के यहां चरण वंदना शुरू कर चुके है वहीं इंडक्शन कोर्स की ट्रेनिंग लेने वाले अफसरों की लाटरी खुल गई है। पहला बैच ट्रेनिंग से वापस लौट रहा है, और जिलाधिकारी पद के लिए दावेदार भी है। 14 फरवरी को उत्तर प्रदेश से गया प्रमोटी आईएएस अफसरों का पहला बैच इंडक्शन ट्रेनिंग लेकर वापस आ गया है।
कार्मिक विभाग के सूत्रों का कहना है कि आबकारी आयुक्त भावनाथ, आवास आयुक्त आर.पी. सिंह, एलडीए वीसी सतेन्द्र कुमार सिंह, गाजियाबाद के डीएम विमल शर्मा को इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम से छूट देने के लिए कार्मिक विभाग ने डीओपीटी को पत्र भेजा है। लेकिन अभी तक डीओपीटी ने इस पर अपनी सहमति नहीं दी है।

प्रमोटी आईएएस फ़िलहाल 22 जिलों के जिलाधिकारी हैं। इनमें मात्र रामपुर के डीएम राकेश कुमार सिंह और देवारिया की डीएम अनीता श्रीवास्तव ने इंडक्शन कोर्स पहले ही कर लिया है। बाकियों को अब 45 दिन के इंडक्शन कोर्स के लिए विदेश और देशाटन पर 28 मार्च को जाना है। इन प्रमोटी आईएएस अफसरों को यह डर सता रहा है कि अगर इंडक्शन कोर्स के लिए गए तो उनकी कुर्सी चली जाएगी। अगली आने वाले सरकार में कलेक्ट्ररी मिलने की उम्मीद भी नहीं है।

बीते चार सालों के अंदर प्रदेश सरकार के प्रयासों के चलते काफी संख्या में पीसीएस अफसर आईएएस सेवा के लिए प्रमोट हुए। इन प्रमोटी आईएएस अफसरों को अनिवार्य रूप से इंडक्शन ट्रेनिंग (45 दिन) लेना होता है। दूसरे राज्यों से ट्रेनिंग के लिए आए अफसरों ने बताया कि डीओपीटी ने पहली बार बाइनेम नोटिस भेजी थी। जिसकी वजह से ट्रेनिंग के लिए आना अनिवार्य था।

कहा जा रहा है कि जिन जिलों में प्रमोटी आईएएस अफसर डीएम हैं, उन जिलों में ट्रेनिंग लेकर वापस लौटे प्रमोटी आईएएस अफसरों को जिलाधिकारी का चार्ज दिया जाएगा। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक किशन सिंह अटोरिया ने बताया कि ट्रेनिंग के लिए अनिवार्य रूप से जाना होगा। जिन लोगों को डीओपीटी से राहत मिलेगी वही ट्रेनिंग न जा पाने के लिए रूकेंगे।

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