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डेविड का खुलासा: बार्क के कर्मचारियों पर थी आईएसआई की नजर

 Tahlka News |  2016-02-12 06:07:11.0

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मुंबई, 12 फरवरी. वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अमेरिकी की जेल से गवाही दे रहे पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने शुक्रवार को बताया कि पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) की नजर मुंबई के संवेदनशील भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) के स्टाफ थी। वह उनसे 'गोपनीय जानकारी' निकलवाना चाहता था। हेडली (56) शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन वीडियो कांफ्रेंसिंग से विशेष टाडा अदालत के न्यायाधीश जी.ए. सनाप के समक्ष गवाही दे रहा है। उसने इस दौरान विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम को बताया कि उसने मुंबई में स्थित बार्क के मुख्यालय के बारे में जानकारी जुटाई व उसकी वीडियोग्राफी भी की थी।


उसने कहा, "इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) गोपनीय जानकारी प्राप्त करने के लिए भविष्य के लिए बार्क के कर्मचारियों की भर्ती करना चाहता था।"

हेडली ने बार्क से संबंधित वीडियो लश्कर-ए-तैयबा(एलईटी) के साजिद मीर और आईएसआई के मेजर इकबाल को दी थीं। इसके अलावा उसने दादर इलाके में स्थित मशहूर सिद्धि विनायक मंदिर व नौसेना के हवाईअड्डे के बारे में भी जानकारी जुटाई थी।


डेविड हेडली ने खुलासा किया है कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर पर भी हमले की लश्कर की योजना थी। इसके लिए हेडली को खासतौर पर रेकी के लिए भी कहा गया था, लेकिन हेडली ने आज कोर्ट को बताया कि उसने आखिरी वक्त में लश्कर के आकाओं को सिद्धिविनायक मंदिर पर हमला नहीं करने को कहा, क्योंकि मंदिर की कड़ी सुरक्षा तो थी ही, साथ ही इस हमले को अंजाम देने के लिए मुंबई के दक्षिण में स्थित नौसेना बेस के पास से गुजरना पड़ता जो चुनौतीपूर्ण था।


ऐसे में सिद्धिविनायक पर हमले को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगानी पड़ती। हेडली ने बताया कि पहले की प्लानिंग के तहत उसने सिद्धिविनायक से 15-20 लाल-पीले धागे खरीदे थे ताकि हमलावर उसे अपनी कलाई में बांधकर भारतीय लग सकें। पाकिस्तान लौटकर उसने वे सारे धागे साजिद मीर को देकर अपना प्लान बताया था और मीर को यह प्लान पसंद भी आया था। बाद में मीर ने हेडली को बताया भी था कि हमलावर यही धागे पहनकर मुंबई गए थे।

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