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तमाम अटकलों के बीच जावीद अहमद को मिली यूपी पुलिस की कमान

  |  2016-01-01 08:02:46.0

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. नये साल के शुरूआती सुबह 1984 बैच के आईपीएस अफसर जावीद अहमद के लिए एक सुखद खबर ले कर आई जब उन्हें सूबे के पुलिस का मुखिया बना दिया गया. मूलतः बिहार के रहने वाले जावीद अहमद अब तक डीजी रेलवे के पद पर तैनात थे. जावीद अहमद 2020 में रिटायर होंगे.

बीते साल यूपी पुलिस ने तीन मुखिया देखे. निवर्तमान DGP जगमोहन यादव को जब बिदाई सलामी दी गयी तब तक कई नाम नए मुखिया की रेस में शामिल हो चुके थे और 1 जनवरी की सुबह जब तक जावीद अहमद का नाम शासन ने घोषित नहीं किया था तब तक कयासों और अफवाहों का दौर चलता रहा.

CXnA3mnUAAEVkCQजावीद अहमद को 6 महीने पहले भी इस रेस का डार्क हार्स माना जा रहा था मगर तब सत्ता शीर्ष से नजदीकियों की वजह से जगमोहन यादव ने बाजी मार ली थी. मगर इस बार जावीद अहमद को उनसे सीनियर अधिकारियों रंजन द्विवेदी, प्रवीण कुमार सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, मलय कुमार सिन्हा और विजय गुप्ता पर तरजीह मिल गयी.


31 दिसंबर की रात जब सूबे की जनता नए साल का जश्न मना रही थी तब सत्ता शीर्ष यूपी पुलिस के नए मुखिया के नाम पर मंथन कर रहा था. 31 की सुबह जगमोहन यादव की विदाई के लिए आयोजित रैतिक परेड के बाद से ही नए नाम के कयास शुरू हो गए थे. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह सहित तमाम बड़े नेता इस पर चिंतन कर रहे थे मगर तब ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अचानक सैफई महोत्सव में भाग लेने के लिए रवाना हो गए.

इस बीच शाम को जब मुलायम सिंह ने 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में डीजी CBCID का पद सम्हाल रहे प्रवीण कुमार को मिलने के लिए बुलाया तब प्रशासनिक गलियारों में प्रवीण सिंह के नाम की पुष्टि की चर्चाएँ चलने लगी. इस बीच हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे हरिश्चंद्र सिंह का नाम भी चर्चा में आ गया.मुख्यमंत्री के सैफई से लौटने के बाद भी कोई नाम स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया और रात करीब 10.30 पर सोशल मीडिया में 1982 बैच के विजय कुमार गुप्ता के नियुक्ति की खबर चलने लगी.

आखिरकार 1 जनवरी की सुबह जावीद अहमद का नाम घोषित कर दिया गया. हलाकि वर्तमान आईपीएस अधिकारियों में 1979 बैच के रंजन द्विवेदी सबसे सीनियर है और अप्रेल 2016 में वे रिटायर हो जायेंगे मगर सियासी गणित में वे फिट नहीं हैं. इसलिए अबी उनके DGP बनने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं. उत्तर प्रदेश में एक परंपरा सी बन गयी है कि सूबे के पुलिस प्रमुख वही बनते हैं जिनकी सत्ता से नजदीकी होती है.

हलाकि जावीद अहमद की छवि साफ़ सुथरी है और उनके पास इस पद पर काम करने के लिए पर्याप्त समय भी होगा. नए मुखिया के सामने पंचायत चुनावो सबसे पहली और तात्कालिक चुनौती होंगे और इसके बाद सूबे की बिगड़ती क़ानून व्यवस्था और सांप्रदायिक तनावों से भी उन्हें निबटना होगा.

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