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दादरी हिंसा बिलकुल सही थी, वेदों में भी ऐसा लिखा है: RSS मुखपत्र

  |  2015-10-18 18:14:16.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माउथपीस पाञ्चजन्य में दादरी में बीफ खाने की अफवाह पर एक शख्स की पीटकर हत्या करने के मामले को सही ठहराया गया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ऐसा बताया गया है। इसके मुताबिक, माउथपीस के लेटेस्ट एडिशन के कवर स्टोरी के मुताबिक, वेद उन 'पापियों' की हत्या के लिए कहते हैं, जो लोग गोवध करते हैं। माउथपीस में यह भी आरोप लगाया गया है कि मदरसे और मुस्लिम नेता युवा मुस्लिमों को देश की परंपराओं से नफरत करना सिखाते हैं। इसके मुताबिक, ''अखलाक (दादरी घटना में मारा गया शख्स) भी इन्हीं बुरी हिदायतों के चलते शायद गोवध में शामिल रहा।'' बता दें कि आरएसएस केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी का आइडियोलॉजिकल संगठन है।


देश कि परम्पराओं से नफरत सिखाते हैं
मुखपत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मदरसे और मुस्लिम नेता युवा मुस्लिमों को गोहत्या करने के लिए उकसाते हैं। ये लोग देश की परंपराओं से नफरत करना सिखाते हैं। लेख के मुताबिक, 'अखलाक इन्हीं बुरी हिदायतों के चलते शायद गोवध में शामिल रहा होगा जिसके तहत उसकी हत्या कर दी गयी। गौरतलब है कि आरएसएस केंद्र में सत्ताधारी भाजपा का आइडियोलॉजिकल संगठन है।


पापियों के प्राण हर लो
पाञ्चजन्य में लिखा गया है कि वेद का आदेश है कि गऊ हत्या करने वाले पापियों के प्राण हर लो। हम में से बहुतों के लिए तो यह जीवन मरण का प्रश्न बन जाता है। सैकड़ों सालों से गोवध हमारे लिए बहुत बड़ा मुद्दा रहा है और आगे भी रहेगा। हमारे पूर्वजों ने भी इसके खिलाफ आवाज उठायी और गोवध रोकने के लिए जान की बाजी लगा दी। इतिहास इसका गवाह है। ऐसे कई मौके आए, जब मुस्लिम घुसपैठियों ने हिंदुओं का धर्मांतरण करने की कोशिश की और उन्हें बलपूर्वक बीफ खिलाना चाहा।


लेखकों से भी किया सवाल
मुखपत्र में साहित्यकारों की ओर से सम्मान लौटाने का भी उल्लेख किया गया है और साहित्यकारों से पूछा गया है कि वे अब तक चुप क्यों थे? लेख के अनुसार न्यूटन ने 1687 में एक थ्योरी दी थी जिसके परिणामस्वरुप हर एक्शन के विपरीत रिएक्शन होना जरुरी होता है।

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