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"नदी का सच" : अनीता अग्रवाल की तीन कविताएँ

 Tahlka News |  2016-03-22 09:46:38.0

anita agrawalअनीता अग्रवाल की कविताओं में एक सहज आब्जर्वेशन है. अपने परिवेश को देखने का एक नजरिया. सामजिक कार्यो के साथ परिवारों को परामर्श दे कर उनको टूटने से बचाना उनका जूनून है तो आलेख लिखना, सामाजिक साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी उनका जीवन .

बीते कई वर्षो से अनीता अग्रवाल विधिक साक्षरता शिविरों में भागीदारी,पीड़ितों-असहायों को नि:शुल्क न्याय दिलाने में मदद, विवाह के पशचात संबंधो में स्थायित्व लाने हेतु सलाह देने के साथ साथ कविताएँ लिख रही है. उनके तीन संग्रह अब तक प्रकाशित हो चुके हैं. तीन दशक से ज्यादा से आकाशवाणी और लगभग पन्द्रह वर्षों से दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों में सक्रिय सहभागिता उन्हें जीवंत बनाये रखता है.



उनके काव्य संग्रह "नदी का सच " से ये तीन कविताएँ हम अपने पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं . 


1.नदी का सच


नदी के उफान के उस पार का सच
किसी को ठीक-ठीक नहीं मालूम
पर इतना तो नहीं होगा
कि ठीक-ठीक जिया न जा सके |



2.जीने की शर्तें


जीने की एक आकांक्षा
सिर उठाकर
जी रही है
रोज, एक आज के मरने के साथ
रोज
एक
सच को
उभरता देखकर
जिंदगी
जी रही है |



3.नियति


जीवन ही नियति
नियति
ही
जीवन
में देखती हूँ
जीवन में नियति का होना


जीवन हो गया है
एक अधूरा सपना |


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