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पठानकोट मामला : पर्रिकर के बयान की पाकिस्तानी अखबार में आलोचना

 Sabahat Vijeta |  2016-03-03 14:48:45.0

manoharइस्लामाबाद, 3 मार्च| एक पाकिस्तानी दैनिक ने पठानकोट वायुसेना अड्डे पर 2 जनवरी को हुए आतंकी हमले के मामले में भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान की आलोचना की है। दैनिक ने कहा कि हमले की जांच मुकम्मल होने से पहले निष्कर्ष निकालना और सार्वजनिक मंच से उसकी घोषणा करना उचित नहीं है। अखबार न्यूज इंटरनेशल ने 'ए क्वेश्चन ऑफ रिस्पांसिबिलिटी' शीर्षक के संपादकीय में लिखा है कि पठानकोट हमले के मकड़जाल में भारत लगातार नई-नई गांठें जोड़ रहा है।


राज्यसभा में पर्रिकर ने शिव सेना सांसद के अनुपूरक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा था कि पाकिस्तान के गैर राजकीय तत्व (नान स्टेट एक्टर्स) निश्चित रूप से हमले के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन सरकारी सहायता के बिना वे सहजतापूर्वक काम नहीं कर सकते थे।


दैनिक ने कहा, "इस बयान की जिम्मेदारी के बारे में हम लोगों को जरूर पूछना चाहिए, जैसे कि अन्य मामलों में नई दिल्ली की ओर से हमसे पूछा जाता रहा है।" अखबार ने लिखा, "हमले की जांच पूरी होने से पहले नतीजे निकालना और सार्वजनिक मंच से उसकी घोषणा करना उचित नहीं है।"


संपादकीय में कहा गया है कि पर्रिकर ने कहा, "पाकिस्तान ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि पठानकोट हमले में लश्कर-ए-झांगवी के लोग संलिप्त हैं।" इस पर अखबार का मानना है कि अटकलों के आधार पर इससे और अधिक निष्कर्ष निकालने से सैन्य प्रतिष्ठान पर हमले की गुत्थी और भी उलझ जाएगी।


संपादकीय में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों को मुख्य रूप से इस बिन्दु पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हमले की साजिश कहां रची गई और कैसे इसे अंजाम दिया गया? अखबार ने लिखा, "इसलिए सभी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। संपादकीय के अनुसार भारत में हुई सुरक्षा चूक से पर्रिकर कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं, क्योंकि वहां इस मामले की भी जांच हो रही है।"


पाकिस्तानी दैनिक ने कहा, "सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पाकिस्तान और भारत, दोनों एक दूसरे को पूरा सहयोग करें ताकि पठानकोट की घटना दोनों देशों के बीच संबंधों के मार्ग में अवरोधक नहीं बने।" दैनिक ने कहा कि जनवरी में होने वाली सचिव स्तरीय वार्ता पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुकी है। ऐसे में नई दिल्ली को समझना चाहिए कि पाकिस्तान के साथ वार्ता और अन्य तरह के पारस्परिक आदान-प्रदानों को स्थगित करने से वह उन्हीं लोगों के हाथों में खेल जाएगा जो दोनों पड़ोसियों के बीच शांति स्थापित होने देना नहीं चाहते हैं।


अखबार का मानना है कि पठानकोट वायु सेना अड्डे पर हमले की जांच विवेकपूर्ण और संवेदनशीलता से होनी चाहिए ताकि आगे उन्मादी माहौल न पैदा हो।

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