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पाटीदारों ने कहा, भाजपा ने कराये थे गुजरात के दंगे

 Tahlka News |  2016-02-23 10:24:39.0

अहमदाबाद. साम्प्रदायिकता बढ़ने के आरोपों से जूझ रही भाजपा को एक बड़े सनसनीखेज आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. गुजरात के पाटीदार आन्दोलन के नेता लालजी भाई पटेल ने मेहसाना में कहा की 2002 में गोधरा काण्ड और दंगे बीजेपी के इशारे पर ही हुए थे पहले हम यह नहीं मानते थे पर अब यकीन है। पिछली बार उनका निशाना मुसलमान थे इस बार उनके निशाने पर पटेल समाज है। यह बिलकुल उसी तरह की सियासत है जिससे नक्सलवाद ने जन्म लिया।

godharaगुजरात में चल रहे पाटीदार आन्दोलन ने एक नया मोड़ ले लिया, जब पाटीदार समिति के शीर्ष नेताओं राहुल देसाई और लालभाई पटेल ने बीजेपी पर सांप्रदायिक सियासत करने के आरोप लगाये! कारवां डेली वेबसाइट के मुताबिक़ पाटीदार नेता राहुल देसाई ने कहा की बीजेपी एक सांप्रदायिक पार्टी है जिसका एजेंडा सालों से मुसलमानों के खिलाफ है।


मोदी दोबारा कभी मुख्यमंत्री नहीं बनता अगर 2002 में गोधरा ट्रेन हादसा नहीं होता। फ़रवरी 2002 में, साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लग जाने से 59 यात्रियों की जान गयी थी। जिसके बाद 31 मुसलमानों को इस काण्ड को अंजाम के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। गोधरा आग काण्ड के बाद गुजरात में मुस्लिम विरोधी लहर दौड़ गयी जिसके चलते 2000 से जायदा मासूम लोगों को मौत के घाट  उतार दिया गया।

राहुल देसाई जो उस वक़्त स्कूल में पढ़ते थे बताते हैं की उस दौरान क्लास में भी गोधरा के विडियो दिखाए जाते थे ताकि मुसलमानों के खिलाफ जनमत तैयार किया जा सके।
“वह लोग में इस बात का प्रचार करते थे की अगर सारे हिन्दू एक साथ मिलकर नहीं रहेंगे तो मुसलमान उन्हें मार डालेंगे। मुझे नहीं पता की गोधरा में ट्रेन में आग लगाने वाले मुसलमान थे या नहीं पर इतना यकीन है की यह बीजेपी की सोची समझी साजिश थी जिससे उन्हें इलेक्शन में सत्ता हासिल करने में फ़ायदा होगा। इस प्रचार ने लोगों को सांप्रदायिक बना दिया और मुझे आज भी ठगा हुआ सा महसूस होता है” देसाई ने कहा।

नेताओं ने कहा कि अब पाटीदार समाज बिलकुल भी उस पार्टी का समर्थन नहीं करना चाहता जिसको उन्होंने पिछले विधान सभा चुनाव में किया था। हालाँकि उन्हें कांग्रेस पार्टी से कई मामलो में मदद मिल रही है लेकिन पाटीदार समाज किसी पर भी आंख मूँद कर भरोसा नहीं करना चाहता।

“अब हम उसी पार्टी को वोट देंगे जो हमारी आरक्षण और पुलिस की ज़यादितियों से मुक्ति जैसी मांगों को पूरा करने का दम रखता हो। पाटीदार समाज पिछड़े वर्ग के ठाकोर और मुसलमानों से तार जोड़ रहा है। यह कोई अचम्भा नहीं होगा अगर यह सब तीसरे मोर्चे के तौर पर उभर कर सामने आएँगे।"

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