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प्रदेश हित में मुझे बहाल करे सरकार : अमिताभ ठाकुर

  |  2015-11-11 14:49:00.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


amitabh-thakurलखनऊ, 11 नवम्बर. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराने वाले चर्चित निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने प्रमुख सचिव गृह को लिखे पत्र में कहा है कि मुझसे कोई काम लिए बिना निलंबित अवधि में जीवन निर्वाह भत्ते के रूप में मुझे सरकार से प्रति माह 81,350 रूपये दिए जा रहे हैं. लोकहित में यह उचित नहीं है. उन्होंने प्रमुख सचिव गृह से खुद को बहाल करने का अनुरोध करते हुए अपने विरुद्ध चल रही सभी जांचों को प्रभावित न करने और सहयोग करते रहने की बात कही है.




अमिताभ ठाकुर ने लिखा है कि एनआरएचएम घोटाले में आरोपित आईएएस प्रदीप शुक्ल को बहाल कर दिया गया. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के फतेहपुर दौरे के दौरान मिली ठोस जानकारी के आधार पर इलाहाबाद मंडल के कमिश्नर बी के सिंह और इस मामले में आगे की जांच के बाद आये तथ्यों के आधार पर अगले दिन 6 जून को फतेहपुर के डीएम राकेश कुमार को अवैध खनन में सीधी संलिप्तता और अवैध खनन रोकने में पूरी तरह नाकाम रहने के गंभीर आरोपों में निलंबित करने के तत्काल बाद बहाल करने के उदाहरण सामने हैं. जबकि मैंने सिर्फ अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग भर किया था. इससे पहले नागरिक सुरक्षा में तैनाती के दौरान मुझे श्रेष्ठ एसीआर मिली थी.



अमिताभ ठाकुर ने लिखा है कि अब मेरे निलंबन के लगभग चार माह बीत चुके हैं. वर्तमान में आईएएस और आईपीएस अफसरों में मैं अकेला निलंबित चल रहा हूँ. इस दौरान मेरे विरुद्ध एक कथित सतर्कता खुली जाँच हुई और उसमे अत्यंत विवादित तरीके से मेरे विरुद्ध थाना गोमतीनगर, लखनऊ में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में एफआईआर दर्ज कराई गई. मैंने इस खुली जाँच में बुलाये जाने पर अपनी ओर से पूरा सहयोग दिया. मैंने अपने विरुद्ध पंजीकृत मुकदमे में भी 2 नवम्बर को विवेचक द्वारा बुलाये जाने पर उन्हें पूरा सहयोग दिया जिन्होंने करीब पांच घंटे तक मुझसे विभिन्न बिन्दुओं पर पूछताछ की जिसमे मैंने अपनी ओर से हर संभव उत्तर प्रस्तुत किया.


स्पेशल जज के आदेश पर मेरी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर के लॉकर की भी सर्च हो चुकी है और मेरे पास अपना कोई लॉकर नहीं है. एक बार अपनी माँ को देखने झारखण्ड जाने के अवसर को छोड़ कर हर बार नियत समय पर मैं इस विभागीय कार्यवाही में निरंतर उपस्थित हुआ हूँ.


अमिताभ ठाकुर ने लिखा है कि मुझे निलंबन से बहाल करते हुए मुझे किसी उचित स्थान पर नियुक्त करते हुए प्रदेश हित में मेरी सेवाएँ लेने की कृपा करें. साथ ही इस पत्र के माध्यम से मैं एक बार पुनः यह अंडरटेकिंग देता हूँ कि मैं अपने विरुद्ध प्रचलित विभागीय/आपराधिक मामलों में कभी भी, किसी भी स्तर पर किसी भी सम्बंधित गवाह, साक्षी आदि को प्रभावित करने, अभिलेखों से छेड़छाड़ करने अथवा अपने पद का कोई भी अनुचित दुरुपयोग करने की कोई कोशिश नहीं करूँगा.

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