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प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को दिया मंत्र, पूछा सीएम के लिए कौन है पसंद

 Sabahat Vijeta |  2016-03-10 15:52:18.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


prashant-kishoreलखनऊ, 10 मार्च. भारतीय राजनीति के नये चाणक्य प्रशांत किशोर ने आज उत्तर प्रदेश कांग्रेस में फिर से जान फूंकने के लिए प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जिला और नगर अध्यक्षों की क्लास ली.


प्रशांत किशोर ने सोए कांग्रेसियों में फिर से उत्साह भरा और पिछली हारों में छिपे उन तथ्यों को सामने रखा जिसके सहारे आसानी से अपने पाँव पर खड़ा हुआ जा सकता है.


जिला और नगर अध्यक्षों को प्रशांत किशोर ने समझाया कि सबसे पहले वह अपने दिमाग से इस ग़लतफ़हमी को निकाल फेंकें कि उत्तर प्रदेश से उनका जनाधार खत्म हो चुका है.


जिला व नगर अध्यक्षों से प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं यहाँ पर न तो पैसा बांटने आया हूँ और न ही किसी को टिकट बांटने आया हूँ. मैं यहाँ सिर्फ यह बताने आया हूँ कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 करोड़ वोट मिले थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 11 करोड़ वोट मिले. अगर कांग्रेस का जनाधार नहीं होता तो 11 करोड़ वोट उनके खाते में नहीं होते.


कांग्रेस के जिला और नगर अध्यक्षों से उन्होंने कहा कि वह सभी अपने-अपने क्षेत्र से 20-20 लोगों के नाम उन्हें भेजें. वह उन्हें बुलायेंगे, उन्हें ट्रेनिंग देंगे, उनके ही क्षेत्र के गाँव उन्हें एलाट करेंगे. यह लोग घर-घर जाकर कांग्रेस की नीतियों को पहुंचाएंगे. साथ ही प्रशांत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह जो 20-20 नामों की सूची उपलब्ध करायेंगे वह टिकट के दावेदार नहीं होना चाहिए. इस टीम के वर्तमान और भविष्य की चिंता भी हम ही करेंगे.


सूत्रों से पता चला है कि प्रशांत किशोर ने सभी जिला और नगर अध्यक्षों को एक प्रश्नावली दी है जिसमें यह सवाल पूछा गया है कि कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री किसे होना चाहिए. इस प्रश्नावली में हर विधानसभा क्षेत्र की ज़रूरतों और कमियों पर भी चर्चा की गई है. इस प्रश्नावली में वह सारी बातें होंगी जिनके आधार पर चुनाव की तैयारी की जाती है.


प्रशांत किशोर के कांग्रेस मुख्यालय में आने से कांग्रेस में जोश भरने की सबसे बड़ी वजह यही है कि अब तक उन्होंने नरेन्द्र मोदी और नितीश कुमार के रूप में दो सफल प्रयोग सामने रखे हैं. नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री और नीतीश को मुख्यमंत्री बनवाने के बाद अब प्रशांत ने यूपी का रुख किया है तो कांग्रेस का हाथ थामा है. ऐसे में कांग्रेस की यूपी में डगर आसान हो सकती है.


कांग्रेस मुख्यालय में प्रशांत मैनेजर कम सलाहकार ज्यादा नज़र आये. जिला और नगर अध्यक्षों को उन्होंने सलाह दी कि उनके लिए बेहतर यह होगा कि वह समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से ज्यादा टकराने की कोशिश न करें यह काम तो हम कर लेंगे. वह अपने निशाने पर भारतीय जनता पार्टी को रखें.


सपा-बसपा को निशाने पर न रखने की बात कहकर प्रशांत से स्पष्ट किया है कि चुनाव के बाद ज़रुरत पड़ने पर इन पार्टियों के साथ समझौता भी किया जा सकता है. भाजपा को निशाने पर रखकर प्रशांत ने कांग्रेस के सामने नेशनल पोलिटिक्स का कैनवस रखा है.


प्रशांत किशोर को अपना इलेक्शन मैनेजर चुनने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने आज खुलकर कुछ नहीं कहा. यूपी कांग्रेस प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि यह संगठन का मसला है और हम इस पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा नहीं कर सकते. किसे लाना है और किसे नहीं, यह हमारा अंदरूनी मामला है.


यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री ने कहा कि साल 2017 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें विभिन्न उपाय करने हैं. किन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ना है. किस तरीके से लड़ाई के मोर्चे पर सेनाओं को सजाना है. कहां पर हमारी कमियां हैं उसे रिपेयर हमें करना है और जो आधुनिक विधाएं हैं युद्ध कौशल की उसके लिए हमें कहां-कहां किन-किन लोगों से क्या-क्या मदद लेनी है, हम वो सब करेंगे. उसमें प्रशांत किशोर किस लेवल पर किस क्षेत्र में हमारे किस तरह मददगार हो सकते हैं. अभी तो बस शुरुआत है.


राजनैतिक दलों ने की कांग्रेस की आलोचना


दूसरी ओर, यूपी में 2017 चुनावों के लिए प्रशांत किशोर को बतौर रणनीतिकार इस्तेमाल करने के फैसले पर कांग्रेस की यूपी में जमकर आलोचना हो रही है. बीएसपी ने इसे जनता का तिरस्कार कर, रणनीतिकारों के बूते नय्या पार लगाने की कोशिश बताया है. वहीं, समाजवादी पार्टी इसे हताशा में उठाया हुआ कदम बता रही है. सपा नेता और यूपी सरकार में जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने तो यहां तक कह दिया है कि कांग्रेस के हवाई जहाज का इंजन फेल हो चुका है और ऐसे में 200 रणनीतिकार भी मिलकर उसके लिए यूपी चुनावों में नई जान नहीं फूंक सकते.

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