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मायावती ने कहा- मनुवादी सोच की हैं लोकसभा अध्‍यक्ष

  |  2016-01-25 07:05:30.0

mayawati

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ, 25 जनवरी. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को जारी बयान में लोकसभा अध्‍यक्ष को मनुवादी सोच की महिला बताया है। उन्‍होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा अहमदाबाद में अधिकारियों व स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों की बैठक में शनिवार को जाति-आधारित आरक्षण की समीक्षा करने की जो बात कही गयी है वह एक मनुवादी सोच की ही उपज होने का शंका ज़ाहिर करती है। वैसे भी यह सर्वविदित है कि आरएसएस की संकीर्ण और घातक मानसिकता रखने वालों द्वारा ‘‘समीक्षा‘‘ की बात करने का अर्थ उस व्यवस्था को समाप्त ही करना होता है।


उन्‍होंने कहा कि जाति-आधारित आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था को समीक्षा कर उसे समाप्त करने की घोर दलित-विरोधी संकीर्ण सोच रखने वाले तत्वों की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि जिस देश व समाज में हर क्षेत्र में व हर स्तर पर ’’जन्म के आधार पर जातिवादी व्यवहार’’ का प्रचलन आम बात हो, वहाँ उस जांत-पांत के अभिशाप के संवैधानिक निदान को समाप्त करने की बात करना अन्याय, शोषण व उत्पीड़न एवं अमानीयवता को और ज़्यादा बढ़ावा देना होगा।


मायावती ने सोमवार को कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर कहा करते थे कि अन्तर-जातीय खान-पान व अन्तर-जातीय विवाह आदि की इक्का-दुक्का घटनाओं से ‘‘जाति‘‘ व्यवस्था समाप्त होने वाली नहीं है। जाति एक मानसिकता है। यह एक प्रकार का मानसिक रोग है। हिन्दुत्व आधारित शिक्षाएं इस बीमारी का मुख्य कारण है। एक कड़ुआ चीज़ को मीठा नहीं बनाया जा सकता है। किसी भी चीज़ का स्वाद बदला जा सकता है, परन्तु ज़हर को अमृत कभी नहीं बनाया जा सकता है। इस प्रकार समाज में हजारों वर्षों से जाति के नाम पर चला आ रहा भेदभाव, असमानता व शोषण एवं अन्याय अगर जाति पर आधारित है, तो उसका समाधान भी जातीय आधार पर ढूढ़ना होगा। यही आदर्श स्थिति है।


उन्‍होंने कहा कि एक तरफ तो हैदराबाद विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र श्री रोहित वेमुला की ’’जातिवादी उत्पीड़न’’ के कारण आत्महत्या करने को मजबूर होने का मामला अभी शान्त भी नहीं हो पाया है कि एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठी महिला ने अपने बयान से आग में घी डालने का ही काम किया है। इतना ही नहीं बल्कि रोहित वेमुला को अगर मरने के बाद भी न्याय नहीं मिला तो यही माना जायेगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रोहित वेमुला के मामले में भावुक हो जाना एक नाटकबाज़ी थी व उनके आँसू वास्तव में घडि़याली आँसू थे।

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