Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

यूपी के केजरीवाल बनेंगे IAS डॉ. सूर्य प्रताप !

  |  2015-10-25 11:08:16.0

उत्कर्ष सिन्हा

surya pratap singhलखनऊ. उम्मीद के मुताबिक यूपी कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी डा. सूर्य प्रताप सिंह ने अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा साफ़ कर दी है. अगर सबकुछ उनकी योजना के अनुसार चला तो उत्तर प्रदेश में वे अरविन्द केजरीवाल शैली की राजनीति शुरू कर देंगे. बीते लगभग 6 महीनो से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए डॉ. सूर्य प्रताप सिंह आने वाली 28 अक्टूबर को लखनऊ में युवा संकल्प सभा का आयोजन कर रहे हैं जहाँ वे एक नयी राजनीति की शुरुआत करेंगे. इसके पहले वे एक नयी पोलिटिकल पार्टी बनाने की अपनी मंशा जाहिर कर भी चुके हैं.

डा. सूर्य प्रताप सिंह ने जब नक़ल माफिया के खिलाफ अपना अभियान शुरू किया था तब वे माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव हुआ करते थे मगर खुद के विभाग में ही भ्रष्टाचार से लडाई में इस कदर उलझे कि सरकार की आंख की किरकिरी बन गए. इसके बाद न तो सरकार का सितम थामा न ही सूर्य प्रताप सिंह की जिद . नतीजतन वे प्रतीक्षारत रहते हुए अपने सेवानिवृत्ति की तिथि का इन्तेजार कर रहे हैं.

अरविन्द केजरीवाल और डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के अभियानो में कई समरुपताये भी हैं. दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं और सरकार के खिलाफ अपने अभियान का जरिया दोनों ने ही सोशल मीडिया को ही बनाया. अरविन्द केजरीवाल ने भी अपने आन्दोलन की शुरुआत भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं के आह्वान से की थी और अपने फेसबुक पेज के जरिये डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने भी भ्रष्टाचार, नक़ल, और नौकरियों में हुए घोटालों को मुख्य मुद्दा बनाया. 'सुशासन' व ‘स्वशासन’ को दोनों ने ही अपना मूल मंत्र घोषित किया है.

डॉ. सिंह ने 'उत्तर प्रदेश बचाओ-उत्तर प्रदेश बनाओ' अभियान के तहत 28 अक्टूबर के युवा संकल्प सभा के बारे में घोषणा करते हुए सम्पूर्ण क्रांति के अगुआ जयप्रकाश को संदर्भित किया है. उन्होंने लिखा है , आओ उत्तर प्रदेश को 'राजनैतिक-ठगों' से मुक्त करें...और जे.पी. के शब्दों में चेतावनी दें कि...'गद्दी छोडो-जनता आती है' ! उत्तर प्रदेश के सम्पूर्ण राजनैतिक, आर्थिक, और सामाजिक उद्भव हेतु...लखनऊ में २८ अक्टूबर को 'युवा संकल्प सभा' का आवाहन !! सम्पूर्ण 'विकास का अर्थ है- 'किसी की आंखों में आंसू न आए'... गरीब..उपेक्षित का 'न संहार हो- और न बहिष्कार हो' !!! उत्तर प्रदेश में 'सुशासन' व ‘स्वशासन’ स्थापित हो ...दलाल भ्रष्टाचारी...कुर्सी छोड़ें...आओ ऐसा आवाहन करें !

अफसरशाही से राजनीति का रास्ता पकड़ने वाले डॉ. सूर्य प्रताप सिंह कोई पहले अधिकारी नहीं है. इसके पहले भी यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ हरीश चन्द्र ने न सिर्फ राजनितिक दल बनाया बल्कि सामाजिक संगठन भी बनाया था और चुनावो में भी प्रत्याशी उतारे मगर जनता का सहयोग नहीं हासिल कर सके. फील्ड में अपने काम के लिए पहचाने जाने वाले पीसीएस अधिकारी बाबा हरदेव सिंह ने भी सियासत का दामन पकड़ा मगर चुनावी मैदान में नहीं सफल हो सके. पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी भाजपा का दमन थामा है और आने वाले चुनावो में किस्मत आजमाने के लिए तैयार बैठे हैं. मगर इन सभी अधिकारियों के राजनितिक रास्तो में फर्क रहा है. अब डॉ. सूर्यप्रताप सिंह अरविन्द केजरीवाल की शैली में सियासी दंगल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
चर्चा इस बात की भी है कि सूबे में व्हिसिल ब्लोवर की छवि बना चुके चर्चित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर भी डा. सिंह की इस राजनीतिक मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं , मगर खुद अमिताभ ठाकुर ने इस बात की संभावना से इनकार किया है. अमिताभ ठाकुर ने तहलका न्यूज़ से कहा कि वे सामाजिक राजनीति में तो अपनी भूमिका जरूर देखते हैं मगर चुनावी राजनीति को न तो वे खुद के लिए उपयुक्त मानते हैं और न ही उनकी इसमें कोई रूचि है. अमिताभ कहते हैं कि भविष्य में वे सामाजिक राजनीति तो करते दिखाई दे सकते हैं मगर दलगत राजनीति कत्तई नहीं.

हालाकि डा. सूर्य प्रताप सिंह की सियासी डगर आसान नहीं होगी. डा. सिंह के आलोचक उनकी नैतिकता पर सवाल उठाने लगे हैं. डा. सिंह पर नियत अवधि से ज्यादा समय तक बिना किसी सूचना के सेवा से बाहर रहने का आरोप भी लग रहा है. डा. सिंह के आलोचक तो यहाँ तक कहने लगे हैं कि वे अपने अमेरिका प्रवास से इस उम्मीद पर ही लौटे थे कि उन्हें मुख्य सचिव या एपीसी बना दिया जायेगा मगर जब सत्ता ने उन्हें उपेक्षित किया तब वे बागी हो गए.

बहरहाल इन आलोचनाओ के बीच डा. सूर्य प्रताप सिंह ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है. इलाहाबाद में लोक सेवा आयोग से अनिल यादव की बर्खास्तगी के कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने आन्दोलनकारी छात्रों के साथ खुद को खड़ा किया , इसके पहले भी वे आयोग के भ्रष्टाचार पर मुखर रहे हैं. जाहिर है डॉ. सिंह की राजनीति की धुरी युवा ही होंगे और इसलिए वे हर उस मसले पर सक्रिय रहेंगे जो युवा भारत से जुड़ा हुआ हो.

मगर इन सबके इतर एक बात और है . अरविन्द केजरीवाल की शैली की राजनीति दिल्ली में तो सफल हो चुकी है मगर ग्रामीण परिवेश और जातीय खांचो में बंटे उत्तर प्रदेश में राजनीति का यह माडल कितना सफल हो पायेगा यह देखने वाली बात होगी.

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top