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रस्म अदायगी से नहीं होगा हिन्दी का विकास: भूपेन्द्र

  |  2016-01-10 17:08:42.0

hindi fzbअयोध्या-फैजाबाद। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने पर ही विश्व में हिन्दी की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, केवल हिन्दी दिवसों पर रस्म अदायगी से और औपचारिकता से हिन्दी का विकास नहीं होगा, जरूरत है हिन्दी कानूनी तौर पर राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हम अपनी सोच एवं व्यवहार में हिन्दी के प्रति सम्मान एवं उसका अनुपालन करना शुरू करें क्योंकि हिन्दी को राष्ट्रभाषा या विश्वभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का संकल्प अभी अधूरा है। उक्त उद्गार आज यहां खाकी अखाड़ा श्रृंगारहाट अयोध्या में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर ’’हिन्दी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान’’ के तत्वावधान में आयोजित बैठक मेें अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त करते हुए अधिवक्ता भूपेन्द्र सिंह गांधी ने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा या विश्वभाषा के रूप में स्थापित करने की यह चुनौती बहुत बड़ी है। उक्त अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए महेश योगी ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी संस्थान व हिन्दी भवन होने चाहिए, डॉ0 उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि संस्थान की विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों में शाखायें स्थापित की जाए और विभिन्न साहित्यों का अनुवाद हिन्दी में किये जाए जिससे अधिक से अधिक लोगांे तक विचार जा सके। मास्टर खलीक अहमद ने कहा कि अन्य प्रदेशों में भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार हो और लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित किये जायें। संस्थान के प्रदेश सचिव डॉ0 एस0 पी0 द्विवेदी ने कहा कि संस्थान द्वारा चलाये जा रहे सदस्यता अभियान से लोगों को तेजी से जोड़ा जाए, जिससे हिन्दी का विकास हो।


बैठक को सम्बोधित करने वाले साहित्यकारों में प्रमुख रूप से डॉ0 संजय पाण्डेय, डॉ0 राममूर्ति चौधरी आर0 ए0 मौर्य, डॉ0 दुर्ग विजय सिंह, डॉ0 महादेव मौर्य, देव बख्श वर्मा, प्रेस क्लब अध्यक्ष महेन्द्र त्रिपाठी, हरीश मौर्य, डी0 पी0 सिंह, शिवसामन्त मौर्य, जिलाध्यक्ष शिव बख्श सागर, बी0 एल0 मौर्य,जन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास, संस्थान के उपाध्यक्ष विंध्यवासिनी शरण पाण्डिया, राजश्री खत्री आदि रहे।


बैठक का संचालन संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ0 सम्राट अशोक मौर्य ने किया और उन्हीं के प्रस्ताव पर पठानकोट के आंतकी हमले में शहीद जाबाज बहादुरों के शोक में दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। बैठक में उपस्थित रहने वाले प्रमुख साहित्यकारों में मुख्य रूप से सी0ए0 चक्रवर्ती मौर्य, भानु प्रताप सिंह, आचार्य स्कन्द दास, अंजनी कुमार सिन्हा, श्रीचन्द्र यादव, राकेश सिंह, अनुराग मिश्र, अफजल, ओम प्रकाश सोनी, दुर्गेश श्रीवास्तव, डॉ0 प्रेमचन्द्र पाण्डेय, पवन तिवारी, धर्म प्रकाश सिंह, आशा मिश्रा, लक्ष्मी पाण्डेय, गिरिजा देवी वर्मा, सुषमा तिवारी, अर्मा टाण्डवी, एच0 एन0 मौर्य, मोहन लाल मौर्य, संस्थान की सचिव डॉ0 शशि मौर्य, अखिलेश मौर्य आदि रहे ।

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