Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

राष्ट्रपति ने कहा-155 साल पुराने आईपीसी में बदलाव की जरूरत

 Tahlka News |  2016-02-27 04:25:17.0

1-27-02-2016-1456540214_storyimage


तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 27 फरवरी.  राष्ट्रद्रोह कानून पर चल रही बहस के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कोच्चि में कहा कि भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) में 21 वीं सदी के अनुसार संशोधन की जरूरत है और 'प्राचीन' पुलिस प्रणाली में भी बदलाव आवश्यक है। उन्होंने भारतीय दण्ड संहिता की 155 वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि 'बीते 155 सालों में आईपीसी में काफी कम बदलाव किए गए हैं। अपराधों की प्रारंभिक सूची में बहुत कम अपराधों को जोड़ा गया और उन्हें दंडनीय बनाया गया है।


उन्होंने कहा, अभी भी संहिता में ऐसे अपराध हैं, जो ब्रिटिश प्रशासन द्वारा औपनिवेशिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए थे। अभी भी कई नवीन अपराध हैं जिन्हें समुचित तरीके से परिभाषित करना और संहिता में शामिल किया जाना है।


उन्होंने कहा कि अपराधिक कानून के लिए यह संहिता एक आदर्श कानून थी, लेकिन 21वीं सदी की बदलती जरूरतों के अनुसार उसमें विस्तृत समीक्षा की जरूरत है।


जेएनयू प्रकरण को लेकर देशद्रोह का कानून आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। आर्थिक अपराधों से आसन्न खतरों को रेखांकित करते हुए, प्रणब ने कहा कि इसने समावेशी समद्धि और राष्ट्रीय विकास को अवरूद्ध किया है।


राष्ट्रपति के अनुसार, पुलिस की छवि उसकी कार्रवाई पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून लागू करने वाली इकाई की भूमिका से आगे बढ़ना चाहिए। भारतीय दंड संहिता एक जनवरी, 1862 से प्रभावी है।


Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top