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राहुल गांधी ने कहा, हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वीसी को हटाओ

  |  2016-01-19 11:26:03.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
हैदराबाद, 19 जनवरी: हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक दलित शोधार्थी की आत्महत्या और उसके बाद भड़के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के चलते कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंचे। वे छात्रों से पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं। राहुल गांधी के साथ दिग्विजय सिंह भी हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। राहुल गांधी ने रोहित की मां से भी मुलाक़ात की।


राहुल ने कहा कि वो एक राजनेता की हैसियत से नहीं आए हैं, बल्कि एक युवा की तरह दूसरे युवाओं से मिलने आए हैं। उन्होंने कहा कि रोहित को ख़ुदकुशी करने पर मजबूर करने वाले सभी लोगों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए. राहुल गांधी ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति के इस्तीफ़े की मांग की।


https://twitter.com/OfficeOfRG/status/689361368428974081

https://twitter.com/OfficeOfRG/status/689377271820357632

बता दें कि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पीएच.डी कर रहे दलित छात्र रोहित वेमुला ने रविवार रात फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली थी। खुदकुशी के करीब एक माह पहले रोहित वेमुला ने वाइस चांसलर को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उसने दलित छात्रों को जहर या अच्‍छी रस्‍सी उपलब्‍ध कराने को कहा था। हालांकि समाचार एजेंसियों के मुताबिक रोहित दलित नहीं था, लेकिन 18 दिसंबर के अपने पत्र में उसने अपने को लगातार दलित के रूप में बताया है।


अपने हाथ से लिए इस पत्र में रोहित ने लिखा है, 'कृपया दाखिले के समय सभी दलित छात्रों को 10 मिलीग्राम सोडियम एजाइड दे दीजिए। जब वे खुद को अंबेडकर की तरह महसूस करें तो उन्‍हें इसके उपयोग की विधि बता दी जाए। अपने सहयोगी, ग्रेट चीफ वार्डन से सभी दलित छात्रों के कमरों में एक अच्‍छी रस्‍सी भिजवा दें।'रोहित ने रूखे अंदाज में कहा है कि वह और उसके जैसे लोग दलित स्‍वाभिमान आंदोलन के सदस्‍य हैं और उन्‍होंने आसानी से छुटकारा नहीं मिलने वाला। इसलिए मैं अपने जैसे छात्रों के लिए इच्‍छामृत्‍यु की सुविधा उपलब्‍ध कराने का आग्रह कर रहा हूं।


इस पत्र के तीन दिन बाद रोहित और चार अन्‍य छात्रों को हॉस्‍टल और मैस से प्रतिबंधित किया गया। इन्‍हें केवल क्‍लास अटेंड करने की इजाजत थी। इस प्रतिबंध को उनके दोस्‍त सामाजिक बहिष्‍कार के तौर पर देख रहे थे। रोहित के दोस्‍त बताते हैं कि वह (रोहित) बुरी तरह से टूट गया था। दो सप्‍ताह से वह कैंपस गेट के बाहर टेंट में रह रहा था और लगातार वाइस चांसलर से मीटिंग की बात कह रहा था।


रविवार को हॉस्‍टल के रूम में  फांसी लगाने के पहले उसने एक और पत्र लिखा लेकिन इस बार अपनी जाति का उल्‍लेख नहीं किया। उसने लिखा था, 'मेरी खुदकुशी के पीछे कोई जिम्मेदार नहीं है। किसी ने मुझे नहीं उकसाया है युनिवर्सिटी के छात्रों का आरोप है कि दत्तात्रेय के स्मृति ईरानी को चिट्ठी लिखने के बाद रोहित को कैम्पस के होस्टल और दूसरे इलाकों में जाने से रोक दिया गया था। मेरे जाने के बाद मेरे दोस्‍तों और दुश्‍मनों को परेशान नहीं करना। पत्र की भाषा कुछ हद तक उसकी कड़वाहट के बजाया उसके अवसादग्रस्‍त और उदास होने का अहसास कराती प्रतीत होती है। अपनी आत्‍मा और शरीर के अंतर के बारे में वह रोहित ने लिखा था, 'मेरा जन्‍म अपने आप में एक दुर्घटना है। मैं बचपन के अपने अकेलेपन से कभी नहीं उबर पाया।'

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