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विजय शंकर पाण्डेय के अच्छे दिन आये, यूपी से मुक्ति मिली

  |  2015-11-10 19:07:17.0

vijay shankarदिवाली बाद केन्द्रीय उर्वरक एवं रसायन सचिव का पदभार ग्रहण करेंगे


तहलका न्यूज़ ब्यूरो 


लखनऊ, 11 नवम्बर. करीब पांच साल से सूबे की सरकारों का दंड झेल रहे वरिष्ठ आइएस अधिकारी विजय शंकर पाण्डेय के लिए यह दीवाली. अच्छी खबर लेकर आई है. अपने तेज तेवरों और साफगोई वाली छवि के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले श्री पाण्डेय इसी हफ्ते केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक सचिव के पद पर काम शुरू कर देंगे. उत्तर प्रदेश शासन ने मंगलवार को उन्हें केन्द्रीय प्रतिनियुक्त पर जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दी दिया है. केंद्र सरकार को श्री पाण्डेय अगले वर्ष दिसम्बर तक सचिव के रूप में अपनी सेवाएँ देंगे. कुछ पदस्थ सूत्रों की माने तो विजय शंकर पांडेय को एक बार केन्द्रीय सरकार ने सचिव पद पर सेवा शुरू करने के बाद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. जानकारों का कहना है कि कालान्तर में उन्हें सीधे प्रधानमन्त्री कार्यालय की भी जिम्मेदारी दी जा सकती है.


उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर और मंडलों में कमिश्नर के तौर पर नौकरशाही की अलग छवि बनाने वाले श्री पाण्डेय को मायावती की पूर्वर्ती सरकार ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और अपर कैबिनेट सचिव के पद पर तैनात किया गया था. तत्कालीन कैबिनेट सचिव स्व. शशांक शेखर के कुछ गलत फैसलों का विरोध करने पर श्री पाण्डेय को वहां से हटाकर राजस्व परिषद के सदस्य पद पर भेज दिया गया था. एक वक्त मायावती के सबसे नजदीकी समझे जाने वाले श्री पाण्डेय ने सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक राजस्व परिषद में ही समय गुजरा. 2012 में अखिलेश यादव की सरकार आई तब भी वे वहीं पड़े रहे. न तो मायावती सरकार ने और न ही अखिलेश यादव सरकार ने श्री पाण्डेय को केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इजाजत दी. कुछ माह पूर्व प्रदेश सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद से निकालकर प्रदेश शासन में प्रमुख सचिव राष्ट्रिय एकीकरण के उस पद पर तैनात किया जहां अलग-अलग सरकारों की नाराजगी के चलते वे पहले भी तैनात रहे है.


उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट आईएएस अफसरों को चिन्हित करने के अभियान के चलते उनकी पूरे देश में चर्चा हुई थी. मायावती के कार्यकाल में उन्हें कालेधन के खिलाफ आवाज उठाने की सजा मिली थी और इस पर उनके खिलाफ विभागीय जाँच करायी जा रही थी. पिछले साल सितम्बर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलफ चल रही विभागीय जाँच को समाप्त करने के साथ ही प्रदेश सरकार को पांच लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया था. उलीख्नीय है कि श्री पाण्डेय ने कालेधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.


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