Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

विदेशों से ज़ब्त होने वाला काला धन गरीबों के कल्याणकारी योजनाओं के लिए - अमित शाह

  |  2015-10-24 12:54:50.0


IndiaTv_AmitShahनई दिल्ली, 24 अक्टूबर : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि विदेशों से ज़ब्त होने वाले काले धन को केन्द्र सरकार गरीबों के कल्याण की योजनाओं पर खर्च करेगी, एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि हर व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख रुपए ट्रान्सफर करने का सवाल ही पैदा नहीं होता.


इंडिया टीवी के शो "आपकी अदालत" में रजत शर्मा द्वारा किये गए सवालों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा - "प्रधानमंत्री मोदीजी ने कहा था कि विदेश में इतना काला धन है कि अगर उसको डिवाइड कर दिया जाय तो हर व्यक्ति के हिस्से में 15 लाख आएगा. इसका मतलब ये किसी के बैंक एकाउंट में जमा नहीं होता. उनका कहने का तात्पर्य ये था कि जितना काला धन आएगा, वह गरीबों के हित में सरकार उपयोग करेगी. जब नेता भाषण देते हैं, तो भावुक होकर बोलते हैं, उसका इस तरह फुल स्टॉप, कॉमा में अर्थ नहीं निकाला जाता है."


राहुल गांधी के बयान 15 लाख रुपए हर नागरिक के बैंक खातों में जमा करने के वादे के सवाल पर अमित शाह ने कहा - " वो उनकी समझ पर निर्भर है. मैं इतना कह सकता हूं कि सरकार के खजाने से किसी के एकाउंट में 15 लाख रुपए किस तरह जा सकता है? सरकार ने ये कहा था और आज भी कमिटमेंट है , इसमें कोई वादाखिलाफी नहीं है, जितना भी काला धन वापस आएगा, वह इस देश के गरीबों के लिए योजना बनाकर खर्च होगा. "


दादरी की घटना पर सवाल के जवाब में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी पुलिस एकतरफा कार्रवाई करके दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा कर रही है. उनका कहना था कि "यूपी पुलिस धर्म के आधार पर भेदभाव किए बगैर काम करे तो कोई दंगा, कोई ऐसी घटना यूपी में भी नहीं होगी. मगर वोट प्राप्त करने के लिए पुलिस एकतरफा कार्रवाई करेगी तो दोनों समुदायों में रिएक्शन होता है और इसी का कारण है कि ऐसी घटनाएं होती है. "


भाजपा अध्यक्ष ने सवाल किया कि दादरी घटना को लेकर किसी ने यूपी के मुख्यमंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं मांगा.




 "एक बात बताइये कि दादरी में जो घटना मीडिया ने पूरा का पूरा बीजेपी पर मढ दिया - आप मुझे समझाइए, यूपी में किस पार्टी की सरकार है ? कानून और व्यवस्था किसका विषय है ? केन्द्र का या राज्य का ? तो समाजवादी पार्टी से कोई पूछता क्यों नहीं, और बीजेपी से सब पूछते हैं, ये मीडिया का स्टैंड मेरे भी समझ में नहीं आता, क्योंकि कंट्रोवर्सी तो वहीं से शुरु हुई थी. किसी की हिम्मत नहीं हुई यूपी के चीफ मिनिस्टर का इस्तीफा मांगने की ? न साहस है मीडिया का."  --अमित शाह 



केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा के बयान जिसमें उन्होंने दादरी घटना को हादसा बताया था के जवाब में अमित शाह ने कहा कि - " उनकी ज़बान फिसली है. उसमें भी आपको स्पष्ट करना चाहता हूं, सबसे पहले दादरी कौन गया ? राहुल गए. उनसे सवाल पूछा आपने ? ..उसके बाद केजरीवाल गए, क्या लेनादेना है उनका यूपी में ? उसके बाद ओवैसी गए. क्या लेनादेना है उनका ? ये महेश शर्मा की कांस्टीट्यूएन्सी है, अगर न गए होते तो मैं उनको डांटता, वो स्थानीय सांसद हैं, वहां जाकर परिवार के साथ खडा रहना उनका फर्ज़ था. उनके मुंह से शब्द निकल गया, उसको पकड के बात का बतंगड बना रहे हैं."


साहित्य अकादेमी पुरस्कार के लौटाए जाने सम्बन्धी विवाद पर अमित शाह ने कहा कि - " सारे जितने भी सिद्धहस्त लेखक हैं, साहित्यकार हैं, वो अपना अवार्ड वापस दे रहे हैं समाजवादी पार्टी और कर्नाटक की कांग्रेस सरकारों के खिलाफ. और आप हम पर कर रहे हैं. जिस लेखक की हत्या कर्नाटक में हुई, वहां कांग्रेस की सरकार है, दादरी कांड यूपी में हुआ जहां एसपी की सरकार है"


लेखिका नयनतारा सहगल के पुरस्कार वापसी के सवाल जिसमें उन्होंने दादरी कांड और लेखकों की हत्या पर प्रधानमंत्री की चुप्पी के कारण अपना पुरस्कार लौटाया था पर अमित शाह का कहना था कि - " प्रधानमंत्रीजी ने कहा है दादरी पर, उसके बाद भी अवार्ड लौटा रहे हैं - काफी लोग तो ऐसे हैं, जो मोदी क्यों चुने न जाएं इसका एक पत्र पारित किए थे लोकसभा चुनाव में. अब मोदीजी चुनकर आ गए हैं, हम क्या करें, हमें जनता ने चुना है."


इसके अलावा अमित शाह का कहना था कि देश में बढती असहिष्णुता को लेकर जो परसेप्शन बना है, वो सिर्फ दिल्ली के लुटयेन्स ज़ोंन तक सीमित है. क्योंकि अगर बीजेपी, आरएसएस, बीएचपी के कारण अगर ये हुआ है तो गुजरात में क्यों नहीं (विरोध) होता? मध्य प्रदेश, राजस्थान, गोवा में क्यों नहीं होता? जहां हमारी सरकारें हैं, वहां तो गडबड करने की ज्यादा अनुकूलता होती है, मगर यहां कानून और व्यवस्था पर वोटबैंक की राजनीति हावी हो गई है, इसलिए दोनों समाजों में तनाव बढा है. "


बिहार विधानसभा चुनावों के बारे में अमित शाह ने साफ किया कि "बीजेपी का बिहारी ही बिहार सरकार चलाएगा". शाह ने ये भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने न तो अभी नेता तय किया है, न ही नेता की जाति तय हुई है. रजत शर्मा के सवाल कि बिहार में बीजेपी का अभियान तो बगैर दूल्हे की बारात जैसी है पर अमित शाह ने कहा कि - " ऐसा कहना ठीक नहीं होगा कि ये बगैर दूल्हे की बारात है. कई बार बीजेपी टीमवर्क के आधार पर चुनाव लडी है और बाद में हमने नेता चयनित किया और अच्छे परिणाम आए. जैसे महाराष्ट्र में हमने कोई सीएम प्रोजेक्ट नहीं किया था, मगर देवेन्द्र फडनवीस बहुत अच्छा काम कर रहे हैं...झारखंड में भी हमने सीएम प्रोजेक्ट नहीं किया मगर रधुवर दास की सरकार ने बहुच अच्छा परफॉर्म किया है. हमारे पास बिहार में अच्छे नेताओं का एक समूह है, जो बिहार को अच्छा शासन दे सकते हैं और सरकार चलाने के अनुभवी नेता भी हैं हमारे पास. बिहार में स्वाभाविक रुप से मोदीजी सरकार नहीं चलाएंगे..बीजेपी का बिहारी ही बिहार सरकार चलाएगा. ..अभी बीजेपी ने सीएम पद के लिए किसी भी व्यक्ति का नाम सोचा नहीं है." पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के इस बयान पर कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सीएम बनने के संकेत दिए हैं, अमित शाह ने कहा - "मांझीजी को उनकी पार्टी की ओर से कहने का अधिकार है. जहां तक बीजेपी का सवाल है, हमने न कोई संकेत दिया है, न कोई नाम तय किया है. "


अमित शाह ने माना कि बिहार में बीफ के मुद्दे के कारण विकास का मुद्दा पीछे रह गया. शाह ने कहा - "लालूजी ने सबसे पहले गोमांस की बात की. अगर लालूजी कहते हैं कि गोमांस और बकरी के मांस में मूलत: कोई फर्क नहीं, तो बीजेपी निश्चित रुप से लोगों के सामने इसे रखने का प्रयास करेगी क्योंकि इससे देश के काफी बडे हिस्से में लोगों की भावनाएं आहत होती है. वोटबैंक की राजनीति के लिए लालू ने ही इसकी शुरुआत की. आप एक बार बांध को तोड देते हो, पानी कहां तक जाएगा, उसका केलकुलेशन रहता है क्या ? आज वही फंसे पडे हैं. ये तो उनको बांध तोडते वक्त तय करना था कि क्या होगा. "

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top