Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के लिए लहलहाते फसल पर चलाए गए बुल्डोजर

 Tahlka News |  2016-03-09 08:07:41.0

NEW DELHI, INDIA - MARCH 7: Newly constructed buildings and structures for a World Cultural Festival organized by Art of Living on the bank of river Yamuna on March 7, 2016 in New Delhi, India. The event, slated to take place between March 11-13 on the west bank of Yamuna floodplain near DND flyover, has been organised to celebrate 35 years of The Art of Living. It is being supported by the Centre and the Delhi government among others, and is expected to attract around 35 lakh people. It has come under the scanner of National Green Tribunal after a set of petitions were filed demanding its cancellation over concerns of potential permanent damage to the riverbed. (Photo by Ravi Choudhary/Hindustan Times via Getty Images)

तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 9 मार्च. देश की राजधानी दिल्ली में यमुना की तराई में आने वाली जमीन पर 11 से 13 मार्च तक विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। देश-विदेश से लाखों लोग इस महोत्सव में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंच रहे हैं, जो महोत्सव में हिस्सा लेकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करेंगे।
लेकिन ये इन लाखों लोगों का गौरव यमुना की तराई में बसे साग-सब्जी की खेती से जिंदगी गुजारने वाले गांववालों पर भारी पड़ रहा है।

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजकों ने इन गांवों के खेतों को पार्किंग एरिया, गाड़ियों के गुजरने के लिए चौड़े रास्तों और कैंप में बदल दिया है। करीब 1,000 एकड़ से ज्यादा जमीन पर ये आयोेजन स्थल तैयार किया जा रहा है।


quint-hindi-2016-03-6b5a091f-8263-4fe2-8f01-b24d055cac21-IMG_3633

स्थानीय किसान इंदरदेव शर्मा के मुताबिक, विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजकों ने खेतों में खड़ी उनकी फसल पर बुल्डोजर चला दिया। जिस खेत में कुछ रोज पहले हरी फसल लहलहा रही थी, उसे अब पत्थर बिछाकर सड़क में तब्दील कर दिया गया है।

quint-hindi-2016-03-73538377-2cd0-43de-8ef7-b084fab2dc1e-IMG_3641

आयोजन स्थल के सबसे करीब वाले गांव में रहने वाली महिला किसान शकुंतला कहती हैं कि उन्हें इस बात का पता भी नहीं था कि ऐसे किसी आयोजन में उनकी जमीन का इस्तेमाल होने वाला है। उन्होंने  बताया कि भइया, हम तो शादी में गए हुए थे और जब लौटे हैं, तो 8-9 बुल्डोजर खेत को रौंदने के लिए तैयार खड़े थे। हमने लाख विरोध किया, लेकिन उनके साथ पुलिस थी।

दूसरे के खेतों में मजदूरी करने वाले एक किसान कहते हैं, “4 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया है। ये कुछ भी नहीं है। 4 हजार रुपए का तो पानी लग जाता है खेत में। ये फसल कम से कम 20 हजार रुपए की थी। लेकिन अब ये कुछ भी नहीं। अब अगली फसल के लिए हमें कम से कम 6 महीने का इंतजार करना होगा।

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top