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VIDEO : शाही अंदाज़ में निकला शाही जरीह का जुलूस

  |  2015-10-17 15:23:31.0

Oct 15 Pix By Indresh-- (27)तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ, 16 अक्टूबर.
माहे मोहर्रम के शुरूआत का एहसास करता हुआ शाही जरीह का जुलूस आज आसिफी इमामबाड़ा (बड़ा इमामबाड़ा) से हुसैनाबाद ट्रस्ट के तत्वधान में पूरी शान-ओ-शौकत के साथ अपने रवायती अंदाज़ में हजारों की तादाद में मौजूद अकीदतमंदों के बीच बरामद हुआ. जुलूस की जियारत के लिए अकीदतमंदों की पहले से भारी संख्या में मौजूद थे. औरतें, बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान काले कपड़े में जुलूस में शामिल तबर्रुकात की जियारत के लिए खड़े थे. जुलूस बरामद होते ही जुलूस से पहले मौलाना मोहम्मद अली हैदर ने मजलिस को ख़िताब करते हुए काफिला-ए-हुसैनी के कर्बला पहुँचने की घटना को बयान किया. मजलिस के बाद शाही जरीह का जुलूस बरामद हुआ.


https://www.youtube.com/watch?v=9sCnXj6hiGU&feature=youtu.be

हुसैनाबाद ट्रस्ट के जेरे एहतेमाम बरामद इस शाही जरीह के जुलूस में आलम मुबारक, शबीह-ए-ज़ुल्जेनाह, गहवारे-ए-हजरत अली असगर अ.स. व अन्य तबर्रुकात की जियारत अकीदतमंदों को करायी गई. जुलूस बरामद होते ही अज़दारान इमाम मजलूम जियारत के लिए आगे बढ़े.


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जुलूस में शामिल बैन्ड मातमी धुन पर नौहा पढ़ रहे थे जुलूस अपने रवायती अंदाज़ में रूमी गेट से होता हुआ, घंटाघर से छोटे इमामबाड़े की तरफ रवाना हुआ.जुलूस के इस्तेकबाल और तबर्रुकात की जियारत के लिए भारी संख्या में अज़ादार सड़क के दोनों तरफ खड़े थे. जुलूस में ऊंट, हाथी और घोड़े पर सवार ट्रस्ट कर्मचारी शाहीन निशान चाँद का ताज, माही मर्तब, शीरदाहान, सूरज चाँद वगैरह लेकर चल रहे थे. जुलूस में तबर्रुकात ले कर चलने वाले कर्मचारी के लिए ख़ास तरह से अरब की पोशाक थी. जुलूस में मर्सियाख्वानी करते चल रहे सोजख्वान हादी रजा व अन्य अपने मखसूस अंदाज़ में मर्सियाख्वानी करते हुए माहोल को और ग़मगीन बना रहे थे उनके जरिये पढ़े रजा रहे मर्सिये में मसायब के बंद को सुनकर अज़ादार अपने पर काबू न कर सके और ज़रोकतार रोने लगे. उन्होंने ने मदीना में जनाब सुगर की कैफियत बयान करते हुए पढ़ा कि –




हजरत को हुआ है माहे मोहर्रम जो सफर में
एक दाग पड़ा और भी सुगर के जिगर में,
नानी से कहा मरती हूँ, दूरी से पिदर में



यह सुनकर अज़दारो ने खूब गिरिया किया. वहीं मर्सियाख्वानी ने दो मोहर्रम को काफिला-ए-हुसैनी के कर्बला आमद को बयान किया. जुलूस में सबसे पीछे अंजुमन शबीरिया नौहा ख्वानी और सीनाजनी करती हुई चल रही थी जुलूस छोटे इमामबाड़े में जाकर खत्म हुआ. देर रात तक अकीदतमंदों के जरिया जियारत और दुआ मांगने का सिलसिला जारी रहा. अकीदतमंदों के लिए विभिन्न संस्थाओं और अज़दारों की तरफ से सबील का एहतेमाम किया गया था. जुलूस के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इन्तेजाम किया गया था. जुलूस की सीसीटीवी कैमरे के साथ ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई.


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