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शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त हो रही हैं लड़कियां

 Sabahat Vijeta |  2016-03-07 13:38:49.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

gov-pressलखनऊ, 7 मार्च. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने आज राजभवन में पत्रकारों से राज्य के विश्वविद्यालयों पर विस्तार से चर्चा की. राज्यपाल इस बात से बहुत खुश दिखे कि उच्च शिक्षा लेने वाली लड़कियां लड़कों से ज्यादा मेहनत से पढ़ाई करती हैं. लड़कियों ने लड़कों से ज्यादा पदक भी हासिल किये हैं.


राज्यपाल ने पत्रकारों को महाशिवरात्रि और विश्व महिला दिवस दोनों की बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज आपसे कुलाधिपति की हैसियत से विश्वविद्यालयों पर बात करूंगा. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए मैं प्रयासरत हूँ. विश्वविद्यालयों के शैक्षिक कलेण्डर में दीक्षान्त समारोह का महत्वपूर्ण स्थान होता है. राज्य के 25 विश्वविद्यालयों में से 20 के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो चुके हैं. चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर का दीक्षान्त समारोह 18 मार्च को होना है तथा डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ का दीक्षान्त समारोह शीघ्र ही प्रस्तावित है. 3 विश्वविद्यालय नवगठित होने के कारण उनमें दीक्षान्त समारोह अभी अपेक्षित नहीं है.


उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त इस वर्ष दीक्षान्त समारोह में भारतीय वेशभूषा धारण करना एक अच्छी और सराहनीय पहल रही. ब्रिटिश काल से दीक्षान्त समारोह की निर्धारित वेशभूषा (गाउन और हैट) दासता सूचक होने के कारण कुलपति सम्मेलन में इसे आंचलिक परिवेश के अनुरुप निर्धारित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था. उन्होंने कहा कि सम्पन्न हुए दीक्षान्त समारोहों में सभी विश्वविद्यालयों ने भारतीय एवं आंचलिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नई वेशभूषा निर्धारित कर धारण की.


राज्यपाल ने कहा कि मेरा प्रयास है कि परीक्षाएं समय पर हों और नक़ल विहीन हों. उनका परिणाम भी समय पर आये. उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि विश्विद्यालय के क्षेत्र में महिलायें सशक्त हो रही हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों में 40 प्रतिशत लड़कियां हैं तो पदक लेने वाले विद्यार्थियों में 67 प्रतिशत लड़कियां हैं.


उन्होंने कहा कि महिलायें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. शोध, खेल, प्रशासनिक, पर्वतारोहण हर क्षेत्र में उन्होंने अपना परचम फहराया है. इसका मूल उद्देश्य समाज में बढ़ती जागरूकता और बेटियों का भी बेटों की तरह ही पालन पोषण करना एवं उन्हें उच्च शिक्षा प्रदान कराना है.


उन्होंने बताया कि कुल 6,35,930 विद्यार्थियों को दीक्षान्त समारोह में उपाधियाँ वितरित की गई, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत छात्राएं रही, किन्तु इन समारोहों में कुल वितरित पदकों में से छात्राओं की संख्या कम होने के बावजूद भी उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु कुल वितरित 1,196 पदकों में से 67 प्रतिशत (806) पदक छात्राओं के पक्ष में गये. विश्वविद्यालयों द्वारा कुल 191 छात्र/ छात्राओं को ‘चान्सलर मेडल‘ प्रदान करने के लिये चयनित किया गया, जिनमें से 62 प्रतिशत (118) पदक पर छात्राओं द्वारा कब्जा किया गया.


कुल 964 छात्र/ छात्राओं को ‘स्वर्ण पदकों‘ से सम्मानित किया गया, उनमें 63 प्रतिशत (609) स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली छात्राएं हैं. विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित विश्वविद्यालयों में प्रदत्त स्वर्ण पदकों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्राविधिक शिक्षा में 71 प्रतिशत पदक छात्राओं ने प्राप्त किये, वहीं सामान्य विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा एवं राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में भी छात्राओं द्वारा क्रमशः 65, 65 एवं 63 प्रतिशत पदक प्राप्त किए गए. केजीएमयू की छात्रा वत्सला पाण्डेय का खासतौर पर ज़िक्र करते हुए राज्यपाल ने बताया कि इस छात्रा ने अकेले 16 स्वर्ण पदक जीते.


राज्यपाल के सामने छात्रों द्वारा उठाये गए आज़ादी के सवाल भी लाये गए. इस पर राज्यपाल ने कहा कि आज़ादी में कोई दिक्कत नहीं लेकिन वह स्वछन्द नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि दुनिया के 200 अच्छे विश्वविद्यालयों की सूची में भारत के भी दो विश्वविद्यालय हैं उसमें एक बेंगलुरु में और दूसरा दिल्ली में है. मैंने उत्तर प्रदेश में भी ऐसे विश्वविद्यालय की तलाश के लिए कहा है जिसे थोड़ी और मेहनत कर सर्वश्रेष्ठ बनाया जा सके.


उन्होंने माना कि कई विश्विद्यालयों में शिक्षकों के कई पद रिक्त पड़े हैं. इन पदों को भरने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है. विश्विद्यालयों में तिरंगा फहराने के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि तिरंगा तो कोई अपने घर पर भी फहरा सकता है लेकिन उसे फहराने का एक तरीका होता है. एक मर्यादा होती है. मैंने सी सम्बन्ध में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पूछा है कि केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में तिरंगा फहराने के आदेश के साथ क्या अपने कोई गाइडलाइन भी भेजी है. अगर हाँ तो वह यहाँ भी भेज दें ताकि उनका यहाँ इस्तेमाल किया जा सके.

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