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शिवरात्रि पर सत्येश्वर महादेव मंदिर में रही धूम

 Sabahat Vijeta |  2016-03-07 17:32:25.0

sitapurसीतापुर, 7 मार्च. सीतापुर जनपद पौराणिक काल से ही पवित्र भूमि रहा है, जहाँ ‘नैमिष’ जैसा पवित्र तीर्थ स्थल है। सीतापुर जनपद के लहरपुर नामक तहसील को क्रियायोग की परमसाधिका माता देवी सत्या ने अपनी साधना स्थली बनाया। माता जी द्वारा ‘श्री अनामि ज्योति आश्रम वाटिका’ की स्थापना की गई।


दया की मूर्ति, करूणामयी माता देवी सत्या 28 दिसम्बर 2012 को दत्तात्रेय जयन्ती के दिन ब्रहमलीन हो गई। उनकी इच्छानुसार समाधि के ऊपर ‘सत्येश्वर महादेव’ की स्थापना की गई। गुजरात तथा राजस्थान के पत्थरों ने निर्मित बेजोड़ वास्तुशिल्प के सत्येश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा जुलाई 2013 में हुई। तबसे ‘ सत्येश्वर महादेव’ का मन्दिर ‘गुरू और शिव भक्ति’ का अद्भुत केन्द्र बन गया है। 24 दिसम्बर 2015 को माता जी के महाप्रयाग दिवस से अनवरत दैनिक रूद्राभिषेक का आयोजन हो रहा है। कोषाध्यक्ष सतीश चौहान तथा महामंत्री मारूति पुरी के प्रयासों से चल रहें, दैनिक रूद्राभिषेक के अनुष्ठान में क्षेत्रीय जनता तथा गणमान्य नागरिकों का पूरा सहयोग मिल रहा है।


7 मार्च को शिवरात्रि के दिन भक्तजनों के सहयोग से वृहद् स्तर पर आयोजन किया गया। 21 वैदिक ब्राहमणों के नेतृत्व में शास्त्रानुसार शिवपूजन किया गया। 7 तारीख को प्रातः दैनिक रूद्राभिषेक के पश्चात् आश्रम के संस्थापक महामंत्री तथा जनपद के लब्धप्रतिष्ठित पत्रकार स्वर्गीय केसी पुरी को उनके जन्म दिवस के अवसर पर 11 बजे पुष्पांजलि अर्पित की गई।


दिन में 1:30 बजे से शिवरात्रि के विशेष पूजन का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न पदार्थों से सत्येश्वर महादेव का अभिषेक 21 आचार्यो द्वारा कराया जायगा तथा भगवान का अद्भुत श्रृंगार गुजरात, राजस्थान तथा दिल्ली से आए भक्तजनों द्वारा किया गया।


गोधूलि बेला में मंगलकारी लोकगीतों के साथ ‘लौकिक परम्परानुसार’ पार्थिव के शिव पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ। इसके पश्चात् ‘गंगा आरती’ की तर्ज पर सत्येश्वर महादेव की ‘101 दीपों वाली’ आरती का आयोजन किया गया।


आरती के पश्चात् शिवरात्रि के चारों प्रहरों में शास्त्रोचित परम्परानुसार महादेव का अभिषेक किया गया। भूत भावन भगवान शिवशंकर का गंगाजल, दुग्ध, कुशोदक, दुर्वादक, तेल, सुगंधित पदार्थ तथा फलों के रस आदि से अभिषेक किया गया।


प्रत्येक अभिषेक के पश्चात, भारत के विभिन्न भागों से शिष्यों द्वारा लायी गई श्रृंगार सामग्री द्वारा भगवान का श्रृंगार किया गया। आखिरी प्रहर के श्रृंगार में भगवान को सुन्दर सेहरा अर्पित किया गया। इसके पश्चात् यज्ञशाला में सत्येश्वर महादेव तथा गुरू को समर्पित हवन का आयोजन किया गया। उषाकाल में हवन के पश्चात् आरती का आयोजन किया गया।


माता जी का मानना था कि असली हवन जठराविन को शान्त करना है। माता जी गीता के पन्हद्रहवें अध्याय का उदाहरण देती थी, जिसका मर्म वह कि भूखे को भोजन कराना ही सच्चा होम है। आश्रम की परम्परानुसार दिनांक 8 मार्च को भोले की रोटी का आयोजन किया जायगा।

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