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सच्चा हुसैनी हर दौर के जुल्म के खिलाफ आवाज़ बुलंद करता है : कल्बे जवाद

  |  2015-10-19 12:25:13.0

कल्बे जवादतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ, 19 अक्टूबर. या हुसैन की सदा मरकजे अज़ादारी के नाम से मशूहर लखनऊ में सुभ से लेकर देर रात तक गूँज रही है. विक्टोरिया स्ट्रीट पर काले कपड़ों में अज़दारों का हुजूम अज़ादारी स्ट्रीट की तरह नजर आ रहा है. अज़दारों के लिए कर्बला के अकीदतमंदों ने सबील और लंगर का इन्तेजाम किया है. सुभ से शाम तक अज़दारों की खिदमत में गौर मुस्लिम ने भी सबील का इन्तेजाम किया है. चौदह सौ साल पहले इस्लाम के नाम पर दहशतगर्दी के जरिये अपनी बैय्य्त करने की कोशिश करने और हराम को हलाल, हलाल को हराम बताने वाले यजीद के खिलाफ इमाम हुसैन अ.स. के जिहाद का पैगाम और तबलीग-ए-इस्लाम का सिलसिला जारी है. चारो तरफ या हुसैन...या हुसैन की सदा गूँज रही है.


वहीं काले झंडो का विरोध करने वालों के खिलाफ प्रदर्शन का भी सिलसिला जारी है . आज मौलाना कल्बे जवाद ने इमामबाडा गुफरानमाब में मजलिस को संबोधित करने के बाद काले झंडे न लगाने के विरोध में प्रदर्शन किया और कहा कि हर जुल्म शिया कौम के उपर ही हो रहा है और डीएम और एडीएम काले झंडे लगाने पर रोक की कोई आर्डर कॉपी नहीं दे रहे है और झूठ बोलकर अदालत को भी गुमराह कर रहे है. इसलिए काले झंडे लगाइए और अगर प्रशासन इसको फिर उतारे या न लगाने दे तो फोटो और वीडियो भी बनाइए ताकि सुबूत के तौर पर अदालत में पेश किया जा सकेगा. मौलाना ने इमामबाडा गुफरानमाब में मजलिस को सम्बोधित करते हुए कहा कि जो मोलवी इसका समर्थन नहीं कर रहे है उनको मजलिस पढने का भी कोई हक़ नहीं क्योकिं मकसदे कर्बला ही यही है की हर जमाने के जालिम और जुल्म के खिलाफ आवाज़ बुलंद की जाये. अगर आज के ज़ालिम और जुल्म के खिलाफ आप चुप है तो मकसदे कर्बला को समझे ही नही. कुछ लोगों ने जालिमो का साथ दिया और कुछ लोगों ने मज़लूमो का साथ दिया. तब कुल्लो यौमिन आशूरा या कुल्लो अर्जिन कर्बला चौथे इमाम का यह कौल समझ में आया.


चूंकि हमको अब यह मालूम है की अब दुबारा कर्बला होनी नहीं है इसलिए लोग यह कहते है कर्बला में हम होते तो यह करते वो करते इसीलिए इमाम ने यह कौल कहा था कि हर वक्त के जालिम की मुखालिफत करो और मजलूम की हिमायत करो तो कर्बला में शुमार हो जायेगा. अगर आज के यजीद का साथ दिया तो उसका शुमार कर्बला के यजीदों में होगा. मौलाना ने कहा कि जो लोग मजलिसों से आज के यजीद के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं कर रहे है उनको न इल्मे कर्बला है न इल्मे हुसैन है और न इल्मे शहादत है.


मौलाना ने आगे मजलिस को ख़िताब करते हुए अज़मते रसूल पर रौशनी डालते हुए कहा की वह और नबी थे जो पैदा होने के बाद नबी बने लेकिन रसूल स.अ. वह है जो नबी बनकर पैदा हुए. अगर जाहिरी कलमे से इस्लाम साबित होता तो जो लोग रसूल की मुखालिफत कर रहे थे वो लोग भी जबानी कलमा पढ़ रहे थे. लेकिन इस्लाम किरदार और अम्ल से साबित होता है.


मौलाना ने कहा की जिस जमीन का जर्फ़ पाक होता है वह बाग़ और सब्ज नजर आता है और जिस जमीन का जर्फ़ खबीश होता है झाड़ के अलावा कुछ नहीं उगता है. बारिश का असर कूड़े पर मत देखो, बारिश का असर देखना है तो बागो में देखो, चमन में देखो अब जिनका जर्फ़ अच्छा था तो कोई अबूजर बना, कोई कम्बर बना तो कोई सलमान बना जिनका जर्फ़ अच्छा नहीं था तो कोई अबु लहब बना कोई मरहब बना.


मौलाना ने आखिर में जनाब हुर अ.स. के मसायब को पढ़ते हुए कहा कि हुसैनी का फरीजा है की जहा पर भी जुल्म हो रहा है उसके खिलाफ आवाज़ बुलंद कर सच्चा हुसैनी होने का सुबूत दे. जुल्म का असर खत्म होने के बाद किसी को माफ़ करना आसान है लेकिन जुल्म हो रहा हो उस दौरान माफ़ करना मुश्किल है लेकिन कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने हुर को जब माफ़ किया उस वक्त जुल्म की हदे बढती जा रही थी. लेकिन रगों में खूने रिसालत दौड़ रहा था और हुर को उस वक्फ माफ़ करके बताया की हमरी रगों में खूने रिसालत दौड़ रहा है.

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