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सियाचिन हादसा: कोमा में हैं हनुमनथप्पा, हालत बेहद नाजुक

 Tahlka News |  2016-02-09 16:35:16.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 9 फरवरी. सियाचिन में छह दिनों तक भारी बर्फ के नीचे दबे रहे लांसनायक हनुमनथप्पा कोपड़ चमत्कारिक ढंग से मौत को मात देने में कामयाब रहे। उन्हें मंगलवार सुबह सियाचिन से दिल्ली के सैन्य अस्पताल लाया गया। हालांकि उनकी हालत अभी नाजुक बनी हुई है।


सैन्य अस्पताल ने मंगलवार को बुलेटिन जारी कर बताया कि सियाचिन में (-40) डिग्री के तापमान में जिंदा रहे हनुमनथप्पा कोमा में हैं। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उनके लिए अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। उनका रक्तचाप बहुत कम है और गुर्दे और लीवर सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत नाजुक, लेकिन स्थिर है। अगले 24 से 48 घंटे का समय काफी महत्वपूर्ण है।


पीएम मोदी और सेनाध्यक्ष अस्पताल देखने पहुंचे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग हनुमनथप्पा को देखने दिल्ली के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल पहुंचे। वह करीब दस मिनट तक उनके समीप रहे। पीएम ने कहा कि वह अभूतपूर्व सैनिक हैं जिनके अदम्य साहस और धैर्य को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। मोदी ने कहा कि इस वीर सैनिक को बचाने का हर संभव प्रयास किया जाए।


सोमवार रात को राहत टीम ने खोजा था
हनुमनथप्पा मद्रास रेजीमेंट के अधिकारियों की टीम के सदस्य थे, जो तीन फरवरी को सियाचिन में पाकिस्तान से लगी नियंत्रण रेखा के निकट 20 हजार पांच सौ फीट की ऊंचाई पर बर्फ का पहाड़ ढहने से उसकी चपेट में आ गए थे। हादसे के बाद से ही सेना और वायुसेना ने दुर्गम इलाके की विषम परिस्थितियों के बीच खोजबीन अभियान चलाया। जबकि हादसे के 48 घंटे बाद सभी सैनिकों को मृत मान लिया गया था। लेकिन सोमवार को चमत्कार देखने को मिला, जब हनुमनथप्पा को बर्फ कठोर चट्टानों के बीच दबा पाया गया।


बर्फ काटकर बाहर निकाला गया
सोनम पोस्ट पर सेना के बचाव दल ने देर रात उन्हें बर्फ काटकर बाहर निकाला। उनकी फाइबर युक्त तंबू ध्वस्त हो चुका था। मेडिकल टीम यह देखकर हैरान रह गई कि हनुमनथप्पा की सांसें चल रही थीं, हालांकि उनकी नाड़ी बेहद धीमी थी। उनकी हालत बहुत खराब थी और शरीर में पानी की कमी थी। मेडिकल टीम ने उन्हें वहीं प्राथमिक चिकित्सा दी। इसके बाद उन्हें साल्तोरो रिज स्थित दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित हैलीपैड से हेलीकाप्टर के जरिये बेस कैंप लाया गया।

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