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'हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है 2 फीसदी वैश्विक जीडीपी'

  |  2015-10-12 19:14:58.0

लीमा, 12 अक्टूबर | वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2 फीसदी हिस्सा हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है. अगर इसे और साफ शब्दों में कहा जाए तो करीब एक से डेढ़ खरब डालर हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है. विश्व बैंक और आईएमएफ की सालाना बैठक के दौरान रविवार को सार्वजनिक प्रशासन में ईमानदारी विषय पर हुए विचार विमर्श में नेचुरल रिसोर्स गवर्नेस इंस्टीट्यूट (एनआरजीआई) के अध्यक्ष डेनियल कौफमैन ने यह तथ्य रखा.


एनआरजीआई न्यूयार्क स्थित एक स्वयंसेवी संस्था है. संस्था ने भ्रष्टाचार पर जो आंकड़े जुटाए हैं, कौफमैन ने उन्हें ही विचार विमर्श के दौरान पेश किया. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कौफमैन ने कहा कि यह भ्रष्टाचार से होने वाला सीधा नुकसान है. इसमें यह नहीं शामिल है कि इस भ्रष्टाचार की वजह से नवोन्मेष और उत्पादकता के कितने अवसरों को खोना पड़ा है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से भ्रष्टाचार के शिकार देशों पर नवोन्मेष और उत्पादकता से प्रतिभाओं को हटा देने का अधिक घातक नतीजा पड़ रहा है.


अध्ययन से पता चलता है कि जिन देशों ने भ्रष्टाचार पर काबू पाया है और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाया है, उनमें लंबी अवधि में प्रति व्यक्ति आय में काफी अधिक बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है. कौफमैन ने कहा कि इससे शिशु मृत्युदर में कमी लाने और शिक्षा को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर बेहतर काबू पाने वाले देशों को बजटीय घाटे पर काबू पाने में 5 फीसदी की मदद मिलेगी और लंबी अवधि में इससे अधिशेष मिलना संभव हो सकेगा. कौफमैन ने कहा कि इस अध्ययन की रोशनी में भ्रष्टाचार को नए सिरे से व्याख्यायित करने की जरूरत है.


कौफमैन ने कहा कि भ्रष्टातार अब दो पक्षों के बीच की बात नहीं रह गया है. यह "गरीब पर..और इससे भी अधिक मध्य वर्ग पर लगने वाला कर है..इसकी वजह से असमानता का स्तर बढ़ रहा है." उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार फुटबाल की विश्व संस्था फीफा जैसे नेटवर्को के जाल का हिस्सा बन चुका है. ये नेटवर्क खेल, संस्था, नीति और संविदा के नियम तय कर रहे हैं. यह छोटे-मोटे भ्रष्टाचार की तुलना में कहीं अधिक घातक है." आईएएनएस

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