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हैदराबाद सुसाइड: मां के बाद अब चाचा ने कहा- दलित नहीं था रोहित वेमूला

  |  2016-01-20 05:57:50.0

Hyderabad: **COMBO** Mother of Rohith Vemula (inset), a doctorate student at the Hyderabad Central University who was found hanging in a hostel room, speaking to media about his son’s depression at Osmania General Hospital in Hyderabad on Monday. PTI Photo   (PTI1_18_2016_000289B)

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
हैदराबाद, 20 जनवरी. हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र रोहित वेमूला सुसाइड मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रोहित का हैदराबाद यूनिवर्सिटी में जनरल कोटे में मेरिट के तहत दाखिला हुआ था, लेकिन उसने अपने एडमिशन फॉर्म में खुद को अनुसूचित जाति (एससी) का बताया था।


एक अखबार में छपी रिपोर्ट में मामले की जांच करने वाले एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि रोहित ने अपने दलित (एससी) होने का कोई सर्टिफिकेट यूनिवर्सिटी को नहीं दिया था। हालांकि उसे ये साक्ष्य देने की भी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि उसका दाखिला कोटे के तहत नहीं हुआ था।


वाडेरा समुदाय से था रोहित
पुलिस अधिकारी ने जब दाह संस्कार से पहले ये जानने की कोशिश की कि रोहित किस समुदाय से है, तो उसके अंकल ने बताया कि उसके पिता वाडेरा समुदाय से हैं। ये समुदाय स्टोन कटर के नाम से पहचाना जाता है और ये दक्षिण भारत में फैला हुआ है। ये समुदाय अनुसूचित जाति में नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश में पिछड़ी जाति में शामिल होता है। रोहित वेमुला आंध्र प्रदेश के गंटूर का रहने वाला था।


एससी हैं रोहित की मां
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, वेमुला की मां अनुसूचित जाति (एससी) हैं। उन्होंने कहा कि वह अभी अपने बेटे की मौत के सदमे में है और आगे जरूरत पड़ी तो वह उनसे उनके एससी होने का साक्ष्य मांग सकते हैं। रोहित के पिता ने उसकी मां को बहुत पहले ही छोड़ दिया था। तब से पीएचडी स्कॉलर रोहित की परवरिश उसकी मां ही कर रही थी। ऐसे में कानून के मुताबिक अनुसूचित जाति की मां के बेटे को भी उसी श्रेणी में रखा जाएगा, इसलिए केंद्रीय राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और वाइस चासंलर अप्पा राव के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।


केंद्रीय मंत्री के खिलाफ केस दर्ज
गौरतलब है कि बंडारू पर आरोप है कि उन्होंने ही मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर रोहित समेत पांच छात्रों को निष्कासित करने की मांग की थी, जिसके बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को निष्कासित कर दिया। उन्हें हॉस्टल से भी निकाल दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से ये छात्र आंदोलन पर थे। बंडारू के खिलाफ छात्रों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

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