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पीलीभीत फर्जी मुठभेड़: CBI कोर्ट ने 47 पुलिसकर्मियों को सुनाई आजीवन कारवास की सजा

 Tahlka News |  2016-04-04 11:27:05.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 4 अप्रैल. करीब 25 साल पहले यूपी के पीलीभीत जिले में हुए फर्जी मुठभेड़ के बहुचर्चित मामले में राजधानी की सीबीआई कोर्ट ने आरोपी 47 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा दी है।


क्या था पूरा मामला
पीलीभीत में 12 जुलाई 1991 को नानकमथा, पटना साहिब जैसे तीर्थस्थलों से सिख यात्रियों का जत्था लौट रहा था। बस में 25 यात्री थे। बताया जाता है कि प्रात: 11 बजे पुलिसवालों ने कछालाघाट पुल के पास जबरन 12 लोगों को बस से उतार लिया। इसके बाद तीन थानों की अलग-अलग पुलिस 4-4 लोगों को बांटकर अपने साथ ले गई। रातभर इधर-उधर घुमाने के बाद अगले दिन उन्‍हें आतंकी बताकर मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। एफआईआर में पुलिस ने इन लोगों को आतंकी बताकर अवैध असलहों से जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था। इसके बाद मृतकों के परिजनों ने पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया तो मामले ने तूल पकड़ लिया।


कोर्ट में दायर की गई याचिका
इसके बाद एडवोकेट आरएस सोढ़ी ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 15 मई 1992 को सीबीआई जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने 12 जून 1995 को स्‍पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें 57 पुलिसवालों पर आरोप लगाया गया, लेकिन सुनवाई के दौरान ही 10 पुलिसवालों की मौत हो गई। कोर्ट ने इस साल 29 मार्च को मामले में सुनवाई पूरी की। वहीं, एक अप्रैल को सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने आदेश सुनाया।


पुलिसवालों ने बदली थी लिस्ट
बताया जाता है कि पुलिसवालों ने खुद को सही साबित करने के लिए बस यात्रियों की लिस्ट तक बदल दी थी। इतना ही नहीं, जो पुलिस के लोग एनकाउंटर में शामिल दिखाए गए थे, उनकी उस समय लोकेशन दूसरी जगह पर थी।


ये लोग पाए गए हैं दोषी
दोषी पाए गए पुलिसवालों में ज्ञानगिरि, लाखन सिंह, हरपाल सिंह, कृष्णवीर सिंह, करन सिह नेमचंद्र, सत्येंद्र सिंह, बदन सिंह, मो अनीस, नत्‍थु सिंह, वीरपाल सिंह, दिनेश सिंह, अरविंद सिंह, राम नगीना, बिजेंद्र सिंह और अन्य शामिल हैं।

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