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... तो 32 साल पहले ही दिल्ली पर हमला करने में समर्थ हो गया था पकिस्तान

 Sabahat Vijeta |  2016-05-29 09:56:44.0

Nuclear-Scientist-Pakistan-Nationalturk-19इस्लामाबाद. पकिस्तान के पंजाब प्रान्त के काहुता से सीधे दिल्ली को निशाना बनाने की सामर्थ्य पकिस्तान के पास 1984 में ही आ गई थी लेकिन उसने परमाणु परीक्षण की अपनी योजना को सिर्फ इसलिए टाल दिया कि तब वह उस अंतर्राष्ट्रीय सहायता को हासिल करने से वंचित रह जाता जो उसे अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के क़ब्ज़े की वजह से मिल रही थी. यह खुलासा पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कदीर खान ने किया है.


अब्दुल कदीर खान ने कहा कि पाकिस्तान के पास 1984 में परमाणु परीक्षण करने की क्षमता थी और उसने योजना भी बनाई थी. लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक ने इस योजना का इसलिए विरोध किया क्योंकि इससे पाकिस्तान को मिल रही अंतर्राष्ट्रीय सहायता में कटौती हो जाती.


पकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ ने अब्दुल क़दीर खान के हवाले से लिखा है कि हम लोग सक्षम थे और हमने वर्ष 1984 में परमाणु परीक्षण करने की योजना भी बनाई थी, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया ने इसका विरोध कर दिया. जनरल जिया का मानना था कि यदि पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया तो दुनिया पाकिस्तान की सैन्य सहायता रोक देगी. कदीर खान ने कहा कि पाकिस्तान पांच मिनट में काहुता से नई दिल्ली को निशाना बनाने में समर्थ था.


खान ने यह भी कहा कि मेरी सेवा के बगैर पाकिस्तान कभी भी परमाणु शक्ति सम्पन्न पहला मुस्लिम राष्ट्र नहीं बन सकता था. खान पाकिस्तान के परमाणु सम्पन्न देश बनने के मौके पर यौम-ए-तकबीर पर एक सभा में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि परमाणु वैज्ञानिकों को पकिस्तान में वह सम्मान नहीं दिया जाता, जिसके वे हकदार हैं. हम लोगों ने अपने देश के परमाणु कार्यक्रम को जो सेवा दी, उसके बदले सबसे खराब दौर का सामना कर रहे हैं.


यह वही अब्दुल क़दीर खान हैं जो 1984 में पकिस्तान को परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बना देने और काहुता से सीधे दिल्ली को निशाना बना देने का दावा कर रहे हैं, उन्हें पकिस्तान को यह क्षमता देने के ठीक बीस साल बाद वर्ष 2004 में एक बड़े परमाणु प्रसार स्कैंडल का केन्द्र बिन्दु बनाया गया था. जनरल परवेज़ मुशर्रफ के कार्यकाल में क़दीर को बहुत ज़लालत झेलनी पड़ी. राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खान को परमाणु प्रसार का एक खतरनाक नेटवर्क संचालित करने का आरोपित बताया था. मुशर्रफ की इस घोषणा के कुछ दिनों बाद खान का रिकॉर्ड किया हुआ एक बयान प्रसारित किया गया जिसमें उन्होंने परमाणु प्रसार की जितनी भी जानकारियां मिली थीं उसकी पूरी जिम्मेदारी अकेले ली थी.

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