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'योग्य' शिक्षा मित्रों की तीन हफ्तों में हो नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट

  |  2015-11-02 14:09:02.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो


लखनऊ, 2 नवंबर. शिक्षा मित्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से योग्य शिक्षा मित्रों को तीन हफ्ते में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि टीईटी में 70 फीसदी अंक और बीएड में 50 फीसदी अंक वाले शिक्षा मित्र एक हफ्ते में आवेदन कर सकते हैं। इस आदेश के तहत सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते में आवदेन लेकर शिक्षामित्रों की तीन हफ्ते में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा है। वहीं, मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। 


जस्टिस दीपक मिश्रा और यूयू ललित की पीठ ने यह आदेश सोमवार को दिया और उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह बताए कि प्रदेश में कुल कितने शिक्षक नियुक्त हुए और कितनी रिक्तियां बाकी हैं। सरकार ने 72,825 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था जिसमें अब तक 43,077 की नियुक्ति कर दी है। कुछ शिक्षक अभी प्रशिक्षण ले रहे हैं। साथ ही कोर्ट ने रिक्तियों की स्थिति में योग्यता मानदंडों के घटाने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। शिक्षामित्रों के मामले में पीठ ने कहा कि इस पर सुनवाई की जाएगी।


कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि वह टीईटी में योग्यता अंक रखने वाले उम्मीदवारों से आवेदन ले। कोर्ट ने कहा कि बेसिक शिक्षा सचिव यह आवेदन लेंगे और तीन हफ्तों में उन्हें नियुक्त करने पर फैसला लेंगे। कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब वकीलों ने कहा कि योग्य उम्मीदवारों को भी सरकार नियुक्त नहीं कर रही है जबकि कई हजार रिक्तियां बाकी हैं।


जो सेवा में, उनके लिये टीईटी अनिवार्य नहीं


शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट देने के मामले में लिखे मुख्य सचिव आलोक रंजन के पत्र के जवाब में एनसीटीई के सदस्य सचिव जुगलाल सिंह ने स्थिति साफ कर दी है। पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि 25 अगस्त, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षक, जो लगातार सेवा में रहे, के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं है। लेकिन जिन शिक्षकों की नियुक्ति इसके बाद हुई है और लगातार सेवा में हैं, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है।


टीईटी पास करना न्यूनतम योग्यता
मानव संसाधन मंत्रालय ने 8 नवम्बर, 2010 में सभी राज्य सरकारों को पत्र लिख कर साफ कर दिया था कि केन्द्र सरकार टीईटी पास करने की अनिवार्यता से छूट नहीं देगी क्योंकि टीईटी पास करना न्यूनतम योग्यताओं में आता है। अत: इसका पालन करना चाहिए।


हाईकोर्ट ने किया था नियुक्ति को रद्द
बताते चलें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने राज्य में 1.72 लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त करने की प्रक्रिया रद्द करने के आदेश दिए थे। उसमें कई बातों को आधार बनाया गया था और यह भी कहा था कि बिना टीईटी उत्तीर्ण किए उम्मीदवार को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता।

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