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8 साल बाद पलट गए मालेगांव धमाके के गवाह

 Sabahat Vijeta |  2016-05-04 13:20:40.0

Malegaonमालेगांव. मालेगांव में वर्ष 2008 में किये गए धमाकों के मामले के दो गवाह अपने बयान से पलट गए हैं. एटीएस के सामने दर्ज कराये गए अपने बयानों को इन दोनों गवाहों ने एनआईए के सामने दी गई गवाही में पलट दिया है. दोनों ने कहा है कि एटीएस ने उनसे दबाव डालकर बयान लिए थे.


राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने मालेगांव में 2008 में हुए धमाकों के उन दोनों गवाहों के बयान फिर से दर्ज किये जिनसे एटीएस ने 2008 और 2009 में बयान लिए थे. एनआईए और एटीएस द्वारा दर्ज बयानों में काफी अंतर पाया गया तो एनआईए ने गवाहों से इसकी वजह पूछी. गवाहों ने कहा कि वह बयान उन्होंने एटीएस के दबाव पर दर्ज कराये थे. एटीएस ने यह बयान अदालत के सामने रिकार्ड नहीं किये थे.


एनआईए ने दिल्ली में मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी से पहले इन गवाहों के बयान दर्ज किये तो वह पुराने बयान से मेल नहीं खाए. एटीएस को दी गवाही में एक गवाह ने कहा था कि मलेगाँव धमाके के सिलसिले में वह अभिनव भारत की मीटिंग में शिरकत करने गया था. एनआईए से गवाह ने उस बयान को दबाव में दिया बयान बताया. एटीएस को गवाह ने बताया था कि यह मीटिंग भोपाल और फरीदाबाद में होने की बात कही गई थी और मीटिंग में लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्ववेदी, मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और प्रज्ञा सिंह ठाकुर शामिल हुई थीं.


दूसरे गवाह ने एटीएस के सामने यह दावा किया था कि उसने मीटिंग में कई तरह के नारे सुने थे. लेकिन एनआईए के सामने वह किसी भी तरह की मीटिंग में जाने की बात से ही मुकर गया और उसने कहा कि इस तरह की बातें उसे मीडिया के माध्यम से सुनने को मिली थीं.


उल्लेखनीय है कि मालेगांव धमाके में 4 लोगों की जान गई थी. 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाके में 4 लोगों की मौत हुई थी और 80 लोग घायल हो गए थे. महाराष्ट्र एटीएस ने तब अपनी तहकीकात के बाद हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें साध्वी प्रज्ञा प्रमुख हैं. इसके अलावा सेना से जुड़े कर्नल पुरोहित को भी मामले में गिरफ्तार किया गया था.

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