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जानिये, यूपी विधान सभा में पहुचने की तैयारी में जुटे हैं कितने बाहुबली और धनबली

 Vikas Tiwari |  2016-11-08 13:33:09.0

assembly elections

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ. लगातार खर्चीले होते चुनाव की वजह से 84 फीसदी प्रत्याशी अब या तो खनन माफिया हैं या शिक्षा माफिया. चिट फंड कम्पनियाँ चलाने वाले और ठेकेदार अब प्रत्याशी बनने लगे हैं. सिर्फ 16 फीसदी प्रत्याशी ही अब ऐसे बचे हैं जिन्हें बुद्धिजीवी कहा जा सकता है. एसोसियेशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र रिसर्च की है. इस रिसर्च में यह पाया गया है कि जिस तरह के लोग चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं उनकी बैकग्राउंड सियासी न होकर धन्ना सेठों की है. एन केन प्रकारेण धन कमाकर वह सियासत के रास्ते पर चलने के लिए चुनावी तैयारियों में जुटे हैं.


एडीआर के इस अध्यन में यह भी पता लगाने की कोशिश की कि आगामी विधानसभा चुनाव में किस तरह के लोग चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहे है और लोगो का उनके बारे में क्या सोचना है. एडीआर के इस अध्ययन के बारे में बाते हुए सीईओ मेजर जनरल अनिल वर्मा ने बताया कि यूपी चुनावों में आजादी के बाद वकीलों, शिक्षकों व अन्य पेशेवरों की संख्या में कमी आई है. जिसका मुख्य कारण चुनावों में पैसे का हो रहा अंधाधुंध उपयोग है.

एडीआर की हालिया की गई एक स्टडी के अनुसार में आगमी विधानसभा चुनाव की तैयारी करने वालें प्रत्यासियों में डॉक्टर, टीचर और वकीलों की संख्या नगण्य है. चुनाव सुधारों के लिए सतत काम कर रही संस्था एडीआर के अध्यन में सामने आया है की विधानसभा चुनाव की तैयारी करने वालों में 21 फीसदी लोगो का मुख्य व्यवसाय ठेकेदारी, 18 फीसदी बिल्डर, 17 फीसदी निजी शिक्षण संस्थाए, 13 फीसदी लोग खनन के कारोबार, 15 फीसदी लोग चिटफंड कंपनी के कारोबार से जुड़े हुए है. इस तरह साफ है कि लोग चुनाव लड़ने के लिए पहले हर प्रकार से पैसे कमाने का कार्य करते है और उसके बाद माननीय बनने के लिए चुनाव लड़ते है. और जब इस तरह के लोग चुनाव लडंगे तो आगामी विधानसभा का स्वरुप क्या होगा ये एक विचारनीय प्रशन है.  एडीआर के द्वारा यह अध्ययन यूपी के 60 विधानसभा सीटों पर किया गया है.

यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारिया जोरों पर है. कुछ सीटों पर टिकट घोषित हो चूका है कुछ जगह घोषित किया जाना बाकी है. सभी सीटों पर कई प्रत्यासी अपना दावा ठोक रहे है. चुनाव में बढ़ रहे पैसे के दुरपयोग और आपराधिक छवि के लोंगो के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए डीआर  एक जागरूकता अभियान भी चलायेगा. 



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