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इस महाकुम्भ से अभिभूत हो गए अखिलेश भी

 Sabahat Vijeta |  2016-11-04 16:32:36.0

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लखनऊ. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ‘‘विजय की ओर विकास रथ यात्रा’’ के प्रथम चरण में ही, जो 3 नवंबर 2016 को लखनऊ से उन्नाव तक थी, इससे राजनीतिक इतिहास का एक नया अध्याय रच गया। कई दशकों पूर्व जिस प्रकार सड़को पर जवाहर लाल नेहरु और लोकनायक जय प्रकाश नारायण को देखने लाखों का हुजूम आ जाता था कमोवेश उसी प्रकार का दृष्टया मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का था। इस दिन 80 किमी के रास्ते में समाज के सभी वर्गो का अपार जन समर्थन सड़को पर उतर आया था।


मुख्यमंत्री ने रथ रवाना होते वक्त और कालिदास मार्ग के चौराहे पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करने के बाद खुली कार में खड़े होकर पूरे रास्ते जनता का अभिवादन स्वीकार किया। बीते साढ़े चार वर्षो में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी सरकार ने तमाम जनहित योजनाओं को लागू किया। उससे पैदा हुए भरोसे का यह मुखर प्रदर्शन भी था।


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अखिलेश जी की लोकप्रियता का आलम ऐसा रहा कि उनको देखने लाखों लोग अपने सारे काम छोड़कर सड़को पर उमड़ पड़े। जहाँ एक तरफ नौजवान काफिले में कई किमी पैदल ही चलते रहे वहीं दूसरी ओर महिलाएं बड़ी संख्या में जगह-जगह एकत्रित होकर पुष्पवर्षा करती रही। बुजुर्ग, नौजवान, व्यापारी, महिलाओं के साथ संत-महात्मा, मौलाना आदि अखिलेश यादव को आशीर्वाद देने के लिए मौजूद थे। जनता जनार्दन का उत्साह अखिलेश यादव को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाने पर केन्द्रित रहा।


पूरे देश में अखिलेश यादव ही एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके साथ चार से अधिक घंटे तक जनता पैदल दौड़ती रही। लखनऊ से उन्नाव तक लगभग 25 लाख की भीड़ बनी रही। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकप्रियता की पराकाष्ठा है। जनता के इस भरोसे और उपस्थिति ने अनेकों रिकार्ड ध्वस्त कर दिये। भारतीय राजनीति में ऐसा जन विश्वास का सैलाब अन्य दलों को हैरान कर गया। अधिवक्ता, श्रमिक, किसान, व्यापारी सहित समाज के विभिन्न वर्गो के लोग अपना कामकाज छोड़कर अपने प्रिय नेता का अभिनन्दन करने घर एवं कार्यालय से बाहर निकल आये।


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स्कूटर इंडिया, सरोजनी नगर, बंथरा, बनी, सोहरामऊ, नवाबगंज, मियाँपुर, हुसैनगंज, अमरौली, चमरौली, बाईपास चैराहा, मोहान, नवलगंज में मुख्यमंत्री की नुक्कड़ सभांए बड़ी सभाओं में तब्दील हो गयी। रास्ते में मिले अपार जन समर्थन से गदगद अखिलेश यादव की आंखो की चमक बहुत कुछ बयां कर रही थी। पूरे रास्ते जनता के इस लगाव के बदले उन्होंने जनता के साथ अपने जुड़ाव को और ज्यादा बढ़ाने का निश्चय किया। उन्होंने बार-बार दोहराया कि दोबारा सरकार बनने पर पहले बजट में ही जनता के लिए अधिक कल्याणकारी राहत पहुँचाने का कार्य होगा।


कानपुर से शुक्लागंज उन्नाव तक बनाई गई 4 लेन सड़क का उद्घाटन करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आज उन्होंने सन 2012 में किया गया वायदा पूरा कर दिया है। उन्नाव में भारी संख्या में अधिवक्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया।


उल्लेखनीय दृश्य यह थे कि रास्ते में स्कूलों से निकलकर बच्चे और शिक्षक भी मुख्यमंत्री का अभिवादन कर रहे थे। महिलाएं गुलाब के फूल बरसा रही थी। कुछ तो उन्हें देखने के लिए पेड़ पर च़ढ़ गए या किनारे लगी रेलिंगो पर चढ़े हुए थे। अपनी-अपनी छतों पर बच्चे, बूढ़े और महिलांए घंटो खड़े रहे ताकि वे अपने प्रिय नेता के प्रति समर्थन जता सके। कई जगह अधिवक्तागण अपनी कोर्ट की ड्रेस में ही कोर्ट छोड़कर मुख्यमंत्री के काफिले के आने का इंतजार करते दिखाई दिये।


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मुख्यमंत्री जी की रात में वापसी के समय भी उनके इंतजार में हजारों लोग सड़क किनारे दिखे। लखनऊ में तो हर पाँच किमी की दूरी पर हजारों लोग स्वागत करते रहे। कैथी-शफीपुर उन्नाव के गाँव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रुककर गाँवों के युवाओं से भेंट किया। उन्होंने गाँव के लोगों के जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।


जनता के इस अथाह प्रेम और लाखों की भीड़ के जयजयकार से अखिलेश भी उत्साहित थे। उनकी आंखो की चमक से लगता था कि वे जनता के इस लगाव से इतना अभिभूत है कि वे सोचते रहे कि बदले में वे क्या कर सकते हैं। दोबारा सरकार बनने पर पहले बजट में ही इनके लिए कुछ करने का संकल्प मन ही मन ले रहे थे।


जिस तरह से जन सैलाब कल 80 किमी के रास्ते पर दिखा उससे साफ संदेश गया है कि उत्तर प्रदेश की जनता अखिलेश यादव को दुबारा मुख्यमंत्री बना देखना चाहती है। कल के महाकुंभ ने यह भी दर्शा दिया है कि अब राजनीति का नया विकल्प उभर आया है जिस पर जनता को गहरा भरोसा है। समाजवादी विचारधारा ही वह नया विकल्प है जिसकी अगुवाई अखिलेश जी कर रहे हैं। एक तरह से यह लोकनायक की ‘‘संपूर्ण क्रांति’’ के अधूरे सपनों को पूरा करने का भी दिशा संकेत है।

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