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डान मुख्तार की आमद से नाराज CM अखिलेश ने किया कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त

 Tahlka News |  2016-06-21 14:48:24.0

akhilesh balraam
उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. समाजवादी पार्टी में आपसी खींचतान एक बार फिर सतह पर आती दिखाई दी, जब माफिया डान और विधायक मुख़्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय से नाराज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक कद्दावर कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त कर दिया.

कहा जा रहा है कि अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बलराम यादव की इस विलय में बड़ी भूमिका थी, जबकि मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी कीमत पर मुख्तार अंसारी को पार्टी में लाने के लिए नहीं तैयार थे.

सोमवार की सुबह ही जौनपुर में जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से मुख्तार अंसारी के पार्टी में शामिल होने पर सवाल किया था तब भी अखिलेश यादव ने कहा था कि “हमें कार्यकर्ताओं के काम का ज्यादा भरोसा है न कि किसी दल के विलय होने का”.


इसके पहले दो दिन से चल रही कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय होने की चर्चा बीती रात को थमने लगी थी जब इस बात के संकेत मिले थे कि खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस विलय के पक्ष में नहीं है.

मगर दोपहर 1.30 बजे समाजवादी पार्टी के यूपी प्रभारी और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में कौमी एकता दल के विलय की घोषणा कर दी. इस घोषणा के वक्त मुख़्तार अंसारी नहीं मौजूद थे मगर उनकी पार्टी के बड़े पदाधिकारी और उनके पूर्व सांसद भाई अफजाल अंसारी और विधायक भाई सिवबग्तुल्ला अंसारी मौजूद थे.

जब मुख्तार के भी पार्टी में आने का सवाल पूछा गया तब शिवपाल यादव ने कहा कि इस मामले में मुख्तार अंसारी से कोई बात नहीं की गयी है यह कौमी एकता दल के नेतृत्व का फैसला है. और अफजाल अंसारी की घर वापसी हुयी है.वे पहले भी समाजवादी पार्टी में ही थे. अफजाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि वे 1996 से ही सपा का झंडा उठाये हुए थे मगर कतिपय कारणों से उन्हें नयी पार्टी बनानी पड़ी थी.

हांलाकि शिवपाल यादव के इस जवाब से यह बात स्पष्ट थी कि वे इस मामले को तूल नहीं देना चाहते मगर यह बात भी सही है कि जब मुख़्तार की पार्टी का ही विलय हो गया तो स्वाभाविक रूप से वे भी अब समाजवादी पार्टी में ही शामिल माने जायेंगे.

दोपहर लगभग 2 बजे जौनपुर से लौटते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राज्यपाल से मिलने चले गए. कहा गया कि वे रोजा अफ्तार के लिए निमंत्रण देने गए हैं, मगर कयास यह भी लगाये जा रहे थे की मंत्रिमंडल में फेरबदल की बात भी हुयी. इसके थोड़ी ही देर बाद बलराम यादव के मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की खबरे भी आने लगी.

बलराम यादव और महबूब अली के मंत्रिपद छोड़ने की पहले भी बात सामने आ रही थी. तब कयास यह था कि इन दोनों के बेटों को मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री शामिल कर लिया जायेगा. मगर कौमी एकता दल के विलय में बड़ी भूमिका निभाने वाले बलराम सिंह यादव को मुख्यमंत्री की नाराजगी का शिकार होना पड़ा.

अखिलेश यादव पहले से ही माफिया छवि वाले नेताओं को पार्टी में लाने के खिलाफ रहे हैं. 2012 के विधान सभा चुनावो से पहले पश्चिमी यूपी के बाहुबली नेता डी पी यादव को भी अखिलेश ने पार्टी में शामिल होने से रोक दिया था. अब मुख़्तार अंसारी के पार्टी में आने से भी अखिलेश बुरी तरह नाराज हो गए हैं.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक बार फिर साबित हो गया है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व  में कई मामलों में सहमति नहीं है. देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावो के पहले समाजवादी पार्टी का सत्ता संतुलन किस तरह बनता बिगड़ता है.

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