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अपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं और मंत्रियों के दाग दोने में लगी अखिलेश सरकार

 Tahlka News |  2016-03-14 07:20:11.0

akhilesh-yadav


तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 14 मार्च. सीएम अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के नेताओं और मंत्रियों के अपराधिक दाग धोने की जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले ली है। ऐसा वह अपराधिक पृषठभूमि वाले माननीयों को जेल पहुंचाकर नहीं करने वाले हैं। ये अभियोजन विभाग के रेकॉर्ड बता रहे हैं। वर्तमान सरकार के कई मंत्रियों और माननीयों से जुड़े गंभीर धाराओं वाले मुकदमे सरकार ने वापस ले लिए हैं। जो मुकदमे वापस नहीं हुए उनमें या तो गवाह पक्षद्रोही हो गया या वादी ने सुलह कर ली। सरकार की तरफ से अभयदान पाने वालों में कुंडा के बाहुबली कैबिनेट मंत्री राजा भैया से लेकर ददुआ के भाई वीर सिंह, मंत्री महबूब अली, पंडित सिंह और पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी भी शामिल हैं।


जानकारों की माने तो सीएम अखिलेश यादव ने राजनीति को साफ-सुथरा करने का ये एक अलग ही नुस्खा ईजाद कर लिया है। पार्टी के अपराधिक छवि वाले नेताओं पर से सभी मुकदमे वापस लेने का। अब जब माननीयों पर मुकदमे ही नहीं रहेंगे तो उनके अपराधिक पृष्ठभूमि के होने का सवाल अपने आप ही खारिज हो जाएगा। ऐसी कोशिश अखिलेश सरकार ने पहले भी की थी लेकिन तब उसे लेने के देने पड़ गए थे।


इन माननीयों पर पहले सजा फिर दोषमुक्त
मिर्ज़ापुर के सपा एमएलए कैलाश चौरसिया को सीजेएम कोर्ट ने 28 फरवरी 2015 में सजा दी। 25 मई 2015 को अपील के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। यहीं के एक अन्य एमएलए जगदम्बा पटेल का मुकदमा भी सरकार ने वापस ले लिया। मुरादाबाद के एमएलए मो. रिजवान के बलवा व अन्य दो मुकदमे भी सरकार ने वापस ले लिए हैं। 

शाहजहांपुर के एमएलए राजेश यादव के खिलाफ बलवा, 7 सीएलए एक्ट व 11 यूनाइटेड स्पेशल पावर एक्ट के तहत दर्ज केस भी छूट गया। बदायूं के एमएलए मुशर्रत अली उर्फ बिट्टन के मुकदमे में सुलह हो गई।


राजा भैया: राजा भैया के जो दो मुकदमे वापस लिए गए हैं वह वर्ष 2006 और 2011 से चल रहे थे। इनमें गैंगस्टर एक्ट, बलवा और 7 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट जैसी गंभीर धाराएं लगी थीं।


अंबिका चौधरी: पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी पर भी बलिया कोतवाली में दर्ज मुकदमा सरकार ने वापस लिया। उन पर आईपीसी की धारा 353 और 332 के तहत आरोप थे।


महबूब अली: मंत्री महबूब अली के खिलाफ अमरोहा में अलग-अलग थानों में, अलग-अलग धाराओं में दर्ज आठ मुकदमे वापस लिए गए। इनके खिलाफ बलवा, आईपीसी की धारा 352, 447, 391, 504, 506 के तहत मामले थे।


माफिया अभय सिंह, बाहुबली मुख्तार अंसारी, सपा विधायक विजय मिश्र, बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह, अजय राय समेत कई माननीयों पर अब भी कई गंभीर धाराओं के करीब 87 मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं। जिनमें साक्ष्यों की गवाही व अन्य प्रक्रियाएं चल रही हैं।


जहां मुकदमे वापस नहीं हो सके वहां सुलह
इनमें अंबेडकरनगर के बाहुबली सपा विधायक अजीमुल हक पहलवान, रायबरेली के बाहुबली अखिलेश सिंह और चित्रकूट के विधायक वीर सिंह शामिल हैं। वीर सिंह का मुकदमा वापसी की प्रक्रिया में था, लेकिन बात नहीं बनी तो फिर सुलह हो गई। इसमें अजीमुल हक के खिलाफ बलवा, गंभीर चोट पहुंचाने व जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप थे।


अखिलेश सिंह के खिलाफ भी जान से मारने की धमकी जैसे आरोप थे। फैजाबाद के युवा सपा विधायक तेज नारायण पाण्डेय के खिलाफ नगर कोतवाली में आईपीसी की धारा 341, 343 व 504 के मुकदमे को सरकार ने वापस ले लिया है। लखनऊ के सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के खिलाफ हसनगंज कोतवाली में दर्ज बलवे का केस वापस लिया गया।


हरदोई के विधायक राजेश वर्मा के बलवा, घर में घुसकर मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में भी केस वापस हो गया है।


सीतापुर के सपा विधायक

अनूप गुप्ता, और नरेन्द्र वर्मा के मुकदमे भी वापस लिए गए।


विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह: दबंग विधायक के रूप में पहचाने जाने वाले कबीना मंत्री गोण्डा के विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के खिलाफ तरबगंज में दर्ज आईपीसी की धारा 279, 304 ए के मुकदमे सरकार ने वापस ले लिए हैं।


इस मामले में बसपा नेता और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का आपराधिक मुकदमे वापस लेना असंवैधानिक है। सपा हमेशा गुंडों, माफिया और अपराधियों को बढ़ावा देती रही है।


वहीं, सपा सरकार मे मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सपा नेताओं पर मायावती के राज में फर्जी मुकदमे लगाए गए थे। अगर हटाया गया है तो उन्हीं मुकदमों को हटाया गया है जो राजनीति से प्रेरित हैं।


इनके अलावा अपना दल से मीरजापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल, भाजपा विधाायक ज्योत्सना श्रीवास्तव, बसपा से चंद्रप्रकाश मिश्र उर्फ गुड्डू महराज, अंबरीश केशरी, सपा से पूर्व सांसद रामकिशुन, जवाहर जायसवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष अखिलेश मिश्र, पूर्व राज्यमंत्री रीबू श्रीवास्तव, अमीरचंद पटेल, पूर्व महानगर अध्यक्ष भैयालाल कन्नौजिया, प्रदेश सचिव आशुतोष सिन्ह समेत 48 माननीयों के बारे में जिला प्रशासन ने स्थानीय थानों से पंद्रह दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। थानों से रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासनिक अफसर उसे शासन को सौंप देंगे।


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