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अखिलेश को महसूस नहीं होने दूंगा “अंकल सिंड्रोम”

 Tahlka News |  2016-06-14 14:12:18.0

amar singh

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ. अपनी जोरदार वापसी के बाद सियासत के बाजीगर अमर सिंह बेबाकी से बोलने लगे हैं. लम्बे समय तक बाहर से पार्टी को देखने के बाद जब अमर सिंह ने वापसी की है तो अब पार्टी पर उनका प्रभाव भी साफ़ साफ़ दिखाई देने लगा है.

एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में अमर सिंह ने कहा कि वह अपनी सीमाएं जानते हैं और राजनीति तथा पारिवारिक रिश्तों के बीच बेहतर संतुलन रखते हुए अपने भतीजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर ‘अंकल सिंड्रोम’ को हावी नहीं होने देंगे.

अपनी दूसरी पारी में अमर सिंह सियासत और रिश्तो के बीच संतुलन साधेंगे. उनका कहना है कि - इसका मतलब यह है कि अखिलेश जहां एक ओर मेरे भतीजे हैं, वहीं वह दूसरी ओर राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं. मैं अखिलेश के प्रति अंकल सिंड्रोम को हावी नहीं होने दूंगा.


अपनी सबसे नजदीकी पूर्व सांसद जयाप्रदा के समायोजित न हो पाने से अमर सिंह खिन्न है . अपनी यह नाराजगी वे छुपाते भी नहीं. उन्होंने कहा यह आश्चर्यजनक है कि जया जी मेरे राज्यसभा के लिए नामांकन से खुश हैं. मैं इस बात से खिन्न हूं कि अपनी लाख कोशिशों के बावजूद मैं उन्हें कहीं समायोजित नहीं करा सका. उन्होंने मेरी वजह से कांग्रेस और भाजपा को इनकार कर दिया. उन्होंने मेरे लिये अपना राजनीतिक करियर कुरबान कर दिया.

अमर सिंह ने कहा - मैं सपा के अघोषित मार्गदर्शक मण्डल का सदस्य हूं. यह सक्रिय होगा या निष्क्रिय रहेगा, यह हमारे नये नेता अखिलेश पर निर्भर करेगा. मेरे पास शिकायत की कोई वजह नहीं है. मैं अपनी पारी खेल चुका हूं. अब मैं ज्यादा धर्य और सहजता से काम लूंगा.

यह पूछे जाने पर कि क्या वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वह ठाकुर बिरादारी को सपा के पक्ष में एकजुट करेंगे, सिंह ने कहा कि वह किसी जाति विशेष के नेता नहीं बनना चाहते. सिंह ने कहा ‘‘उस समय : ठाकुर बिरादरी: के जो लोग मेरे पीछे थे, वे पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के पौत्र रविशंकर सिंह पप्पू को विधानपरिषद सदस्य का टिकट दिलाना चाहते थे.

इसके लिये जब मैंने जोर डाला तो सपा के कुछ नेताओं से मेरी तल्खी हो गयी थी. यही बात पार्टी नेतृत्व और मेरे बीच रिश्ते खराब होने का कारण बनी थी. उन्होंने कहा अब समय और परिस्थितियां बदल चुकी हैं. अब वे ठाकुर मित्र मेरे आसपास नजर नहीं आते.

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