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वजारत मिली तो पैरों पर बिछ गये वज़ीर

 Sabahat Vijeta |  2016-09-26 17:30:27.0

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शबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. राजभवन का गांधी सभागार जो कभी दरबार हाल कहलाता था आज इस बात का गवाह बना कि नाम बदल लेने से हालात नहीं बदलते हैं. यूपी का बादशाह आज अपने वजीरों के नाम मंजर-ए-आम पर ला रहा था और कुछ वज़ीर थे कि दरबारी बनने को आमादा थे. बादशाह और बादशाह के वालिद के पैरों पर बिछे जा रहे थे. गवर्नर तक को डांटना पड़ा कि अनुशासन में रहो, यह सब क्या है.


लखनऊ स्थित राजभवन में पुनः मन्त्री पद की शपथ लेने से पूर्व सपा मुखिया मुलायम सिंह की चरण वंदना करते गायत्री प्रजापति

यह वज़ीर जो दरबारी का चोला उतारने को तैयार नहीं हैं इन्हें सिर्फ 15 दिन पहले ही वज़ारत से बेदखल किया गया था. इनकी वज़ारत छिनने के बाद बादशाह के घर में मुसीबत आ गई थी. कहना चाहिए कि महाभारत छिड़ गई थी. बादशाह को पालने वाला चचा बेटे सामान भतीजे से खफा हो गया था. चचा ने भतीजे के दोस्तों को पार्टी से बाहर कर दिया था. बादशाह के वालिद भी कम नाराज़ नहीं थे. लखनऊ और दिल्ली में तमाम मीटिंग हुई. महाभारत रोकने के लिये निकाले गये वज़ीर को फिर से वज़ीर बनाने की शर्त रखी गई.


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बादशाह ने अपने वालिद की शर्त मान ली. एक के बजाय 10 वज़ीरों को ईमानदारी से काम करने की क़सम दिलवा दी. वालिद साहब खुश हो गये. इलेक्शन से थोड़ा पहले वालिद साहब के करीबियों को तोहफे बांटे तो अपने दोस्त का भी प्रमोशन कर दिया. दरबार हाल के स्टेज पर बादशाह के चेहरे की खुशी ने यही बताया कि हम हारे नहीं जीते हुए हैं. किसी भी वज़ीर के क़सम खाने के बाद अपनी कुर्सी छोड़कर खड़े होकर हाथ नहीं मिलाकर बादशाह ने बताया कि यह सब मेरी मर्ज़ी से नहीं हो रहा है. साथ ही बगैर मर्ज़ी अपनी सरकार का हिस्सा बनने वाले का बार-बार पैर छूना भी बादशाह को नागवार लगा. बादशाह का चेहरा गवर्नर ने भी पढ़ा और वज़ीर को अनुशासन का पाठ पढ़ा दिया. गवर्नर ने डपटा तो यह वज़ीर बादशाह के वालिद के पैरों के पास बैठकर घमंड करने लगा.


दोबारा मिली वजारत का मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया है. अब अदालत तय करेगी कि क्या करना है.

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