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सिर्फ जुमला बनकर न रह जाए 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड और एक कीमत'

 Tahlka News |  2016-04-07 12:53:51.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 7 अप्रैल. बिजली इन्जीनियरों ने केंद्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल के एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक बिजली मूल्य के बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि एक बिजली मूल्य की सफलता के लिए पिछले सालों में निगमीकरण के नाम पर बनाए गए तमाम निगमों का एकीकरण कर एक बिजली निगम बनाना तकनीकी जरूरत है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो एक बिजली कीमत का नारा सिर्फ जुमला बन कर रह जाएगा।


ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और अभियन्ता संघ के महासचिव डीसी दीक्षित ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि निगमीकरण और निजीकरण की पिछले 25 सालों से चल रही ऊर्जा नीति के परिणामस्वरूप एक प्रांत में ही अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली दरें अलग-अलग हैं। यहां तक कि निजीकरण के चलते राजधानी दिल्ली और मुंबई में एक शहर में ही अलग-अलग बिजली दरें हैं। ऐसे में एक राष्ट्र, एक ग्रिड और एक कीमत (one nation, one grid, one cost) के नारे का कोई अर्थ नहीं है।


वापस लेना चाहिए इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेन्ट) बिल
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार एक राष्ट्र, एक ग्रिड और एक कीमत की बात कर रही है तो दूसरी और इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेन्ट) बिल के जरिये एक ही क्षेत्र में कई बिजली आपूर्ति के लाइसेन्स देने की प्रक्रिया चल रही है। इससे उपभोक्ताओं को एक ही इलाके में अलग-अलग लाइसेन्सी से अलग-अलग दाम पर बिजली मिलेगी। ऐसे में केन्द्र सरकार को एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक कीमत पर अपनी योजना साफतौर पर रखना चाहिए और इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेन्ट) बिल पूरी तरह वापस लेना चाहिए।


बदलाव से पहले करें आर्थिक समीक्षा
अभियंता पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली राज्य का विषय है और हर राज्य में अलग विद्युत नियामक आयोग है। जो कि बिजली की दरें तय करता है। ऐसे में केंद्र सरकार को यह भी बताना चाहिए कि पूरे देश में एक कीमत का लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि देश का बिजली क्षेत्र लगातार किये जा रहे प्रयोगों से मरणासन्न हो गया है। ऐसे में इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेन्ट) बिल सहित कोई भी नया प्रयोग करने से पहले पिछले 25 सालों में किये गये बदलाव की सार्थक समीक्षा की जानी चाहिए।

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