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हाईकोर्ट ने कहा-कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं, ट्रिपल तलाक क्रूरता

 Girish Tiwari |  2016-12-08 06:39:39.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को ट्रिपल तलाक मुद्दे पर कहा कि मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक देना क्रूरता है। ट्रिपल तलाक मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है।


दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि ट्रिपल तलाक पर इस्लामिक कानून गलत व्याख्या कर रहा है। पवित्र कुरान में भी तलाक को अच्‍छा नहीं माना गया है।भारत में मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग है। तीन तलाक असंवैधानिक है। यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन करता है।


दूसरी तरफ आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को शरियत के खिलाफ बताया है। बोर्ड के अनुसार इस फैसले को वह कोर्ट में चुनौती देंगे। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक विद्वान खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस फैसले को शरियत कानून के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा हमारे मुल्क के संविधान ने हमें अपने पर्सनल लॉ पर अमल करने की पूरी-पूरी आजादी दी है। इस वजह से हमलोग इस फैसले से मुत्तफिक नहीं है। पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी इस फैसले को स्टडी करके इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में अपील करेगी।


बताते चले कि हाईकोर्ट ने बुलंदशहर की हिना और उमरबी द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। 24 साल की हिना की शादी 53 साल के एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे बाद में तलाक दे दिया। जबकि उमरबी का पति दुबई में रहता है जिसने उसे फोन पर तलाक दे दिया था। जिसके बाद उसने अपने प्रेमी के साथ शादी कर ली थी।


जब उमरबी का पति दुबई से लौटा तो उसने हाईकोर्ट में कहा कि उसने तलाक दिया ही नहीं। उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी से शादी करने के लिए झूठ बोला है। इस पर कोर्ट ने उसे एसएसपी के पास जाने को कहा।


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