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आज़म समझ गए `मन से हैं मुलायम, इरादे लोहा हैं`

 Sabahat Vijeta |  2016-05-17 17:46:51.0

amar-mulayamशबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. आज़म खां अमर सिंह की लगातार मुखालफत करते रहे. उन्हें कूड़ा-करकट तक कहा. उनसे अपनी जान का खतरा तक बताया. सच पूछा जाए तो वह आज़म खां ही हैं जिनकी वजह से अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में इतने लम्बे वक़्त तक वापसी नहीं हो पायी. आज मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को राज्यसभा का टिकट देकर आज़म खां और प्रोफ़ेसर राम गोपाल तक की परवाह नहीं की तो दर्द आज़म के चेहरे पर तैर गया.


मुलायम के सामने दिक्क़त यह है कि उनके सामने जितना प्रिय राम गोपाल और आज़म हैं उतना ही अमर सिंह भी हैं. आज़म अमर सिंह के बारे में जो मुंह में आये बोलते रहे लेकिन मुलायम न सिर्फ अमर सिंह को अपने दिल में जगह दिए रहे बल्कि आज़म खां को जवाब भी देते रहे. जब आज़म खां ने कहा कि उन्हें अमर सिंह से जान का खतरा है तो मुलायम ने कहा कि मेरे रहते आज़म को डरने की ज़रुरत नहीं है.


mulayam-azamअमर सिंह समाजवादी पार्टी में उत्तर और दक्षिण ध्रुव की तरह से हैं लेकिन मुलायम दोनों को बैलेंस करने की कोशिश में लगे रहे. आज़म की वजह से उन्होंने अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में वापसी तो नहीं कराई लेकिन पिछले काफी वक्त से दोनों की गलबहियां किसी से छुपी नहीं थीं. मुलायम सिंह के हर पारिवारिक समारोह में अमर सिंह आगे-आगे रहे. मुलायम सिंह की 76वीं सालगिरह पर अमर सिंह के आने पर आज़म खां ने कहा भी था कि जब तूफ़ान आता है तो कूड़ा करकट आ ही जाता है. मुलायम ने तो तब भी दोनों को बैलेंस करना चाहा था. इसी वजह से उन्होंने अपनी सालगिरह का दो बार केक काटा. एक बार आज़म खां के साथ और दूसरी बार अमर सिंह के साथ.


समाजवादी पार्टी में अमर सिंह की वापसी की अटकलें कई बार लगी हैं. आज उनको राज्यसभा का टिकट मिल गया है लेकिन पार्टी में वापसी की अटकलें तो अभी भी लगी ही हैं. आज संसदीय बोर्ड की बैठक में प्रोफ़ेसर राम गोपाल के विरोध के बावजूद मुलायम ने उनके नाम पर मोहर लगाईं. शिवपाल सिंह यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब अमर सिंह और नेताजी चाहेंगे अमर सिंह की पार्टी में वापसी हो जायेगी. आज़म खां अमर सिंह को राज्यसभा टिकट से इतना नाराज़ हुए कि उनके मुंह से निकला कि नेताजी समाजवादी पार्टी के मालिक हैं जिसे चाहें पार्टी में रखें. उनके फैसले को चुनौती देना मेरा अधिकार नहीं है. हालांकि वह यह कहने से नहीं चूके कि यह बहुत दुखद है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से पार्टी को लेकर अच्छी चर्चा नहीं हुई है.


अमर सिंह की एक बात तो आज पूरी तरह से सच साबित हुई. अमर सिंह ने कई बार यह कहा कि मुलायम सिंह मेरे बड़े भाई हैं और अखिलेश भतीजे, वह रहेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि मनुष्य का भाग्य कब किस करवट बैठे कुछ कहा नहीं जा सकता. वाकई मुलायम ने साबित किया कि अमर सिंह उनके दिल में हैं और वह उनके लिए कोई भी कीमत अदा कर सकते हैं. हाल में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश ने अमर सिंह को अमर सिंह अंकल कहकर उनके प्रकरण पर बात की थी. रही बात अमर सिंह के भाग्य की तो राज्यसभा की सीट तो आज उनके भाग्य में आ ही गई.


आज़म लगातार अमर सिंह पर चुटकियाँ लेते रहे और अमर सिंह इस सबसे बेखबर समाजवादी पार्टी के तमाम कार्यक्रमों में मुलायम सिंह के साथ शिरकत करते रहे. वह लोकायुक्त के शपथ ग्रहण में आये. जनेश्वर मिश्र की स्मृति में हुए कार्यक्रम में आये. अखिलेश यादव की रोज़ा अफ्तार पार्टी में आये. मुलायम के लखनऊ और सैफई के घरों पर आते रहे. अमर सिंह जिस-जिस कार्यक्रम का हिस्सा बने आज़म मंच से खुद ही नदारद हो गए. सियासत में आज़म खां का सबसे ज्यादा विरोध तीन लोगों से है अमर सिंह, जयाप्रदा और जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना बुखारी. इत्तफाक है कि यह तीनों भी मुलायम को उतना ही प्रिय हैं जितना आज़म. आज़म को वह पूरा सम्मान देते रहे लेकिन कभी बुखारी के दामाद को टिकट दे दिया. आज़म को गले लगाए रहे और अमर सिंह को राज्यसभा के लिए रवाना कर दिया. आज़म आज चुप रह गए, शायद समझ गए कि वह मन से हैं मुलायम इरादे लोहा हैं. तभी कहा नेताजी मालिक हैं जिसे चाहें रखें.

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