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अमित जानी ने दाखिल की सरेंडर याचिका, मेरठ में करेंगे समर्पण

 Tahlka News |  2016-04-25 13:07:04.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 25 अप्रैल. डीटीसी बस के माध्यम से जेएनयू में हथियार भेजने और कन्हैया कुमार समेत दसके साथी उमर खालिद की हत्या की साजिश रचने के आरोप में वांछित उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी मेरठ में आत्मसमर्पण करेंगे। विधानसभा चुनाव 2012 में राहुल गांधी की एक सभा में काले झंडे दिखाने के एक पुराने मामले में मेरठ की एसीजेएम दशम अदालत में उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट है। उसी वारंट में पेश होने के लिए अमित जानी ने सोमवार को अदालत में सरेंडर याचिका लगाई है। अदालती कार्रवाई पूरी होते ही एक या दो दिन में अमित जानी मेरठ कचहरी आकर समर्पण कर देंगे। जहां से उनको मेरठ जेल ले जाया जाएगा। ऐसे में दिल्ली पुलिस को पूछताछ के लिए मेरठ जेल आना होगा।


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बता दें कि कन्हैया कुमार की हत्या के लिए जेएनयू ले जाये जा रहे हथियार के साथ अमित जानी का पत्र बरामद होने के बाद अब अमित जानी पर पुलिस का शिकंजा और मजबूत हो गया थ। दिल्ली पुलिस ने अमित जानी के लाजपतनगर स्तिथ ऑफिस पे दबिश दी थी तभी से ताबड़तोड़ दबिशों का सिलसिला जारी है। दिल्ली पुलिस ने ऑफिस के बाद अमित जानी के मेरठ स्थित आवास, फेक्ट्री और फार्म हाउस पे भी छापा मारा था।


मीडिया के सवाल पर अमित जानी ने कहा था कि क्या हो जाता अगर कन्हैया मर भी जाता तो? एक देशद्रोही से दिल्ली पुलिस कुछ जरुरत से अधिक हमदर्दी दिखा रही है। अमित जानी ने कहा कि मैं स्वीकारता हूं कि हथियार उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना ही जेएनयू में पहुंचा रही थी तो इसमें इतना हंगामे वाली कौन सी बात है, अमित जानी ने कहा कि हंगामा है क्यों बरपा, पिस्टल ही तो मिली है, डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है।


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फेसबुक पोस्ट के जरिए दी धमकी
जानी ने इस बाबत अपने लंबे फेसबुक पोस्ट ‘मेरा वादा, मतलब पत्थर की लकीर!’ में लिखा है, ‘जिनकी राष्ट्रभक्ति सिर्फ व्हाट्सअप या फेसबुक तक ही सिमित है, जो मैगी खाते हुए, पूल में या बार में बियर के साथ देश की चिंता या राष्ट्रभक्ति का दम भरते है, उनके लिए ‪अमित_जानी‬ को क्रिटिसाइज करना बहुत आसान है! ‪‎कन्हैया‬ का क्या हुआ? गोली मारने वाले थे? जैसे वाहियात सवाल लिखने वाले अनपढ़ और जाहिल लोग ये भी याद रखे कि मैंने खुद ही उसको 31 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया है! 31 मार्च के बाद जैसे ही एक एक दिन आगे बढ़े आप मुझसे सवाल करना? हफ्ता 10 दिन बीत जाए तो मुझे झूठा, लफ्फाज, हवाबाज और जो मन आए कहना. गाली भी दोगे तो भी मैं सहन करूंगा! लेकिन आज कुंठित होकर, बकवास करने की क्या जरूरत है? मेरा वादा मतलब पत्थर की लकीर! जो कह दिया सो कह दिया! 31 मार्च बीत जाने दो, जेएनयू परिसर गोलियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठेगा!’

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